अमेरिका और इस्राईल ने हिज़्बुल्लाह से अली अल-ताहिर की पहाड़ियों से हटने की मांग की
एक लेबनानी राजनयिक सूत्र ने बताया है कि लेबनान और इस्राईल के बीच वार्ता का अगला दौर अगले महीने आयोजित नहीं होगा। यदि वार्ता होती भी है, तो इसकी संभावना है कि इसे गर्मियों के समाप्त होने के बाद तक टाल दिया जाएगा।
अल-मयादीन की रिपोर्ट के अनुसार, एक लेबनानी राजनयिक सूत्र ने इस चैनल के संवाददाता से बातचीत में बताया कि अगले महीने लेबनान और इस्राईली पक्ष के बीच वार्ता का नया दौर आयोजित करने की कोई योजना नहीं है। यदि वार्ता का नया दौर आयोजित किया जाता है, तो संभवतः यह बैठकें गर्मियों के समाप्त होने के बाद होंगी।
इस राजनयिक सूत्र ने यह भी बताया कि अमेरिकी और इस्राईली पक्षों ने “पायलट क्षेत्रों” के विस्तार का विरोध किया है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों के विस्तार से पहले पहले से निर्धारित दो क्षेत्रों में “प्रगति” हासिल की जानी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, लेबनानी प्रतिनिधिमंडल ने इस्राईल के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि दक्षिणी लेबनान में हुई सभी धमाकों की घटनाएं सैन्य ढांचे को निशाना बनाए जाने के कारण हुई हैं।
इस लेबनानी राजनयिक सूत्र ने आगे बताया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी और इस्राईली प्रतिनिधिमंडलों ने नबातिये क्षेत्र में स्थित अली अल-ताहिर की पहाड़ियों से हिज़्बुल्लाह के हटने की मांग की।
अली अल-ताहिर की पहाड़ियों का भू-राजनीतिक महत्व बहुत अधिक है। इन पहाड़ियों पर कब्ज़ा होने से इस्राईली बलों को क्षेत्र में बेहतर निगरानी और प्रभावी गोलीबारी की रणनीतिक बढ़त हासिल हो सकती है।
इसी बीच, अल-मयादीन के संवाददाता ने गाजा पट्टी के मध्य भाग में स्थित अल-बुरैज शरणार्थी शिविर के उत्तर-पूर्वी इलाके में इस्राईली सेना की ओर से की गई तोपखाने की गोलाबारी की भी खबर दी है।
इस्राईल और लेबनान के बीच होने वाली इन तथाकथित “शांति वार्ताओं” की शुरुआत वर्ष 2026 में इस्राईल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष दोबारा शुरू होने के बाद इस्राईल और लेबनानी सरकार के बीच हुई। इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप एक समझौते पर सहमति बनी, जिसे “फ्रेमवर्क समझौता” कहा गया है।
हिज़्बुल्लाह ने इन वार्ताओं को खारिज कर दिया है और लेबनान सरकार से अपनी नीति की व्यापक समीक्षा करने, मौजूदा दिशा में सुधार करने तथा उन वार्ताओं को रोकने का आग्रह किया है, जिन्हें हिज़्बुल्लाह ने “अपमानजनक और बिना किसी सौदेबाजी की ताकत के” बताया है।
फ्रेमवर्क समझौते में इस्राईली शासन द्वारा लेबनान के कब्ज़े वाले क्षेत्रों से क्रमिक वापसी पर जोर दिया गया है। इसकी शुरुआत कुछ निर्धारित “पायलट क्षेत्रों” में समझौते के एक चरण को लागू करने और इन क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती से होगी।

