नोबेल विजेता की चेतावनी: ईरान पर अमेरिका का कोई भी नया हमला ‘पागलपन भरा क़दम’ होगा
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पूर्व महानिदेशक मोहम्मद अलबरदेई ने चेतावनी दी है कि, ईरान पर अमेरिका का कोई भी नया सैन्य हमला ‘पागलपन भरा क़दम’ होगा। इससे केवल हिंसा और विनाश बढ़ेगा तथा पश्चिम एशिया को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।
अलबरदेई ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा, “ईरान पर अमेरिका का कोई भी अतिरिक्त हमला पागलपन भरा क़दम होगा और इससे केवल हिंसा तथा विनाश ही बढ़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “मैं उन सभी लोगों से आग्रह करता हूँ, जिनका इस लापरवाह व्यक्ति पर प्रभाव है कि वे उसे ऐसा करने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा दें।” यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में की गई थी।
अलबरदेई ने 2005 में IAEA के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया था। उन्हें यह सम्मान परमाणु ऊर्जा के सैन्य उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग को रोकने के प्रयासों के लिए दिया गया था। वह पहले भी कई बार अमेरिका द्वारा सैन्य तनाव बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दे चुके हैं।
ईरान पर नए हमलों की ट्रंप की धमकियों के बीच आई चेतावनी
अलबरदेई की यह ताज़ा टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के ख़िलाफ़ दोबारा हमले करने की लगातार दी जा रही धमकियों के बीच आई है। इससे पहले जून 2025 में अमेरिका और इस्राईल ने संयुक्त रूप से ईरान के ख़िलाफ़ 12 दिनों तक सैन्य अभियान चलाया था। इस दौरान ईरान की संरक्षित नागरिक परमाणु सुविधाओं—फोर्दो, नतांज और इस्फहान—को निशाना बनाया गया था।
लेख के अनुसार, ये हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का खुला उल्लंघन थे।
इस्राईल द्वारा शुरू किए गए इस 12 दिवसीय सैन्य अभियान में बाद में अमेरिका भी शामिल हो गया था। इस दौरान ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की गई, सैकड़ों नागरिक मारे गए और IAEA की निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी सैन्य अभियान चलाए। लेख के अनुसार, इन जवाबी कार्रवाइयों के कारण हमले रोकने पड़े और ईरान ने आत्मरक्षा के अपने अंतर्निहित अधिकार को रेखांकित किया।
ट्रंप की नई धमकियाँ और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती
जून 2025 के हमलों के बाद से ट्रंप कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि, भविष्य में ईरान पर होने वाले हमले पहले से कहीं अधिक विनाशकारी होंगे। उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बलों के एक विशाल बेड़े—जिसे उन्होंने ‘विशाल युद्धपोत बेड़ा’ (Massive Armada) कहा—और अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की तैनाती भी की है।
लेख के अनुसार, ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और उसकी रक्षात्मक क्षमताओं से जुड़े विभिन्न कारणों का हवाला देकर इस सैन्य तैनाती को उचित ठहराने की कोशिश की गई है। ईरानी अधिकारियों ने लगातार इन धमकियों को ग़ैर-क़ानूनी और उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि ईरान के सशस्त्र बल किसी भी नए हमले का तत्काल और ज़ोरदार जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इराक़ युद्ध से तुलना: ‘मनमाने युद्धों’ के विनाशकारी परिणाम
अलबरदेई की चेतावनी उनके पहले के बयानों की भी याद दिलाती है, जिनमें उन्होंने 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक़ पर किए गए आक्रमण से समानताएँ बताई थीं। इराक़ युद्ध को लेकर लेख में कहा गया है कि यह सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) की मौजूदगी के झूठे दावों पर आधारित एक ग़ैर-क़ानूनी और अनैतिक युद्ध था। इसके परिणामस्वरूप भारी मानवीय पीड़ा हुई, पूरा क्षेत्र तबाही की चपेट में आया और लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही।
अलबरदेई पहले भी इस बात पर जोर दे चुके हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य बल के इस्तेमाल को उचित ठहराने वाला कोई स्पष्ट और तत्काल ख़तरा मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के तहत ऐसे सैन्य हमलों के लिए आवश्यक कानूनी अधिकार का अभाव है तथा अपनी इच्छा से शुरू किए जाने वाले युद्धों की क़ीमत बेहद भयावह होती है।
सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर ज़ोर
परमाणु मुद्दों के समाधान के लिए सैन्य बल के बजाय कूटनीति की लंबे समय से वकालत करने वाले अलबरदेई का मानना है कि धमकियों और सैन्य हमलों से परमाणु अप्रसार व्यवस्था कमज़ोर होती है। ऐसी कार्रवाइयाँ IAEA की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाती हैं और पूरे क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव का खतरा बढ़ा देती हैं।

