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सीएनएन ने आयतुल्लाह ख़ामेनेई के विदाई समारोह को “शक्ति प्रदर्शन” क्यों बताया?

सीएनएन ने आयतुल्लाह ख़ामेनेई के विदाई समारोह को “शक्ति प्रदर्शन” क्यों बताया?

कल तेहरान के इमाम ख़ुमैनी मुसल्ला में शहीद नेता और उनके परिवार के पार्थिव शरीर पर नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई। इस अवसर पर अभूतपूर्व और अत्यंत विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा। इससे दो दिन पहले भी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने अत्यंत गरिमापूर्ण और प्रभावशाली वातावरण में श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

विदेशी मेहमानों की उपस्थिति, सुव्यवस्थित श्रद्धांजलि समारोह, शहीद नेता को अंतिम विदाई तथा नमाज़—इन सबको सामाजिक निष्ठा, संस्थागत निरंतरता और अमेरिका की “युद्ध या वार्ता” की नीति के सामने ईरान की राजनीतिक इच्छाशक्ति के प्रदर्शन के रूप में देखा गया।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई की नमाज़ किसी शून्य या नेतृत्वहीनता का प्रतीक नहीं थी, बल्कि यह जनता, परिवार, संस्थाओं और धार्मिक परंपराओं की एकता का दृश्य थी। यह एक ऐसा वैश्विक संदेश था जिसने दिखाया कि ईरान शोक में रुक नहीं गया है, बल्कि उसी शोक के बीच उसने स्वयं को और अधिक संगठित किया है।

यही ज़मीनी वास्तविकता थी जिसने CNN को इस घटना के लिए “शक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन” जैसी सुर्ख़ी देने पर मजबूर कर दिया। उसके अनुसार, शहीद नेता के लिए आयोजित शोक समारोह ईरानियों की एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन बन गया।

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ईरान सरकार इस ऐतिहासिक अवसर के लिए कितनी अच्छी तरह तैयार थी। उसने भीषण गर्मी से लोगों को राहत देने के लिए धुंध (मिस्ट) छोड़ने वाली शीतलन प्रणालियाँ लगाई थीं, जिनकी मदद से लाखों लोगों की मौजूदगी को व्यवस्थित ढंग से संभाला गया। इसकी तुलना अमेरिका के उस समारोह से कीजिए, जहाँ कल राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यक्रम के दौरान राज्य मेले में गर्मी के कारण दर्जनों लोग बेहोश हो गए। इस सप्ताहांत वॉशिंगटन डी.सी. और तेहरान से सामने आई तस्वीरें एक ओर पतन की ओर बढ़ती हुई एक महाशक्ति और दूसरी ओर अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट, आत्मगौरव से भरे और आगे बढ़ते हुए एक राष्ट्र की तस्वीर पेश करती हैं।

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