शिकागो : अमेरिका की प्रख्यात पत्रिका फॉरेन अफेयर्स ने अमेरिका के मुकाबले ईरान की ताकत के पहलुओं का ज़िक्र करते हुए कहा है कि अब वह दौर समाप्त हो गया है जब अमेरिका अपनी सैन्य श्रेष्ठता के भरोसे युद्धों को जल्दी खत्म कर देता था।
शिकागो विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रॉबर्ट पेप ने फॉरेन अफेयर्स में लिखा कि ईरान के साथ टकराव उस दौर के अंत का संकेत है, जिसमें अमेरिका अपनी सैन्य ताकत के दम पर युद्धों को जल्दी समाप्त करने की उम्मीद करता था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1991 का खाड़ी युद्ध, जिसने अमेरिका की ताकत की छवि बनाई थी, आज के संघर्ष से अलग था। आधुनिक सैन्य तकनीक, खासकर ड्रोन और कम लागत वाली सटीक मिसाइलों ने युद्ध का तरीका बदल दिया है। अब ये हथियार केवल महाशक्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे देशों के पास भी हैं, जिनकी मदद से वे युद्ध को लंबा खींच सकते हैं और दुश्मन को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ईरान को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अमेरिका से सीधे युद्ध करने की ज़रूरत नहीं है। वह अपनी मिसाइल शक्ति, क्षेत्रीय सहयोगी बलों और गैर-पारंपरिक तरीकों के ज़रिए समुद्री यातायात और दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। हुर्मुज़ जलडमरूमध्य का संकट वैश्विक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर नियंत्रण शक्ति का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

