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तेहरान का मुसल्ला मैदान आयतुल्लाह ख़ामेनेई के सोग और “इंतिक़ाम” के नारों से गूंज उठा: सीएनएन

तेहरान का मुसल्ला मैदान आयतुल्लाह ख़ामेनेई के सोग और “इंतिक़ाम” के नारों से गूंज उठा: सीएनएन

ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में जमा हुई भीड़ को देखकर अमेरिका और इस्राईल के होश उड़ गए होंगे। जिस समय ईरान के सुप्रीम लीडर को शहीद करने के बाद ट्रंप और नेतन्याहू अकड़ के साथ अपनी पीठ थपथपा रहे थे, उस समय में उनके वहमो गुमान में भी नहीं था कि, उन्होंने इतिहास की सबसे बड़ी ग़लती कर दी है।

ट्रंप और नेतन्याहू की सबसे बुरी आदत यही है कि, वह धोखे से किसी भी मज़लूम को क़त्ल करने को अपनी जीत समझते हैं, लेकिन सुप्रीम लीडर को अलविदा कहने पहुंची भीड़ को देखकर उन्हें अपनी हार पर यक़ीन आ गया होगा। दुनिया में किसी भी लीडर के अंतिम संस्कार में इतनी भीड़ नहीं हुई जितनी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के जनाज़े में हुई। तेहरान का मुसल्ला मैदान अमेरिका मुर्दाबाद, इस्राईल मुर्दाबाद के नारों से गूंज उठा।

अमेरिकी समाचार नेटवर्क सीएनएन ने ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई को अंतिम विदाई देने के समारोह पर अपनी रिपोर्ट में लिखा कि तेहरान की मुसल्ला शोक, आंसुओं और “इंतिक़ाम” के नारों से गूंज उठी। रिपोर्ट के अनुसार, हजारों शोकाकुल लोगों ने सीना-ज़नी और मातम करते हुए और नारे लगाते हुए आयतुल्लाह ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी।

सीएनएन ने Associated Press के हवाले से लिखा कि भीड़ एक स्वर में नारे लगा रही थी— “हमारी एक ही आवाज़ है: इंतिक़ाम! इंतिक़ाम!”

डॉयचे वेले: शहीद नेता को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों ईरानी उमड़ पड़े

जर्मन समाचार नेटवर्क डॉयचे वेले ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि तेहरान के मुसल्ला में लाखों ईरानी अपने शहीद नेता को अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए। लाल झंडे लिए शोकाकुल लोग नारों और अश्कों के बीच अपने शहीद नेता के ताबूत को विदाई दे रहे थे।

इंक़िलाब चौक पर स्थापित ‘भींची हुई मुट्ठी’ के स्मारक के पास गूंजे प्रतिरोध के नारे

रूसी समाचार एजेंसी तास ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि तेहरान के इंक़िलाब चौक पर स्थापित “भींची हुई मुट्ठी” के स्मारक के पास बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर दृढ़ता, प्रतिरोध और डटे रहने के समर्थन में नारे लगाए।

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