लेबनान सरकार की इस्राईल के साथ बातचीत बंद, वार्ता में आया गतिरोध
लेबनान सरकार, जो अभी तक यह दावा कर रही थी कि, बातचीत के माध्यम से वह इस्राईली सैनिकों की क़ब्ज़े वाले इलाक़ों से वापसी सुनिश्चित करा सकती है, अब उसने बातचीत को निलंबित कर दिया है। बेरूत का कहना है कि इस्राईल द्वारा दक्षिणी लेबनान में प्रस्तावित ‘पायलट क्षेत्रों’ (प्रायोगिक क्षेत्रों) की योजना का विस्तार नहीं किए जाने के कारण आगे की बातचीत फिलहाल रोक दी गई है।
फार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, इस्राईल के रेडियो और टेलीविजन संगठन ने जानकार सूत्रों के हवाले से बताया कि लेबनान के साथ बातचीत के अगले दौर की तारीख तय होने में देरी का कारण दोनों पक्षों के बीच बढ़ता तनाव है।
इस्राईल के रेडियो और टेलीविजन संगठन ने बताया कि बेरूत ने दक्षिणी लेबनान में इस्राईली सेना की वापसी वाले क्षेत्रों का विस्तार नहीं किए जाने के कारण निकट भविष्य में बातचीत जारी रखने से इनकार कर दिया है।
इन सूत्रों ने इस्राईली सेना के दक्षिणी लेबनान में कब्जा जारी रखने का कारण बताते हुए इस हिब्रू मीडिया को कहा कि इस्राईल ने लेबनान की सेना की गतिविधियों को लेकर अमेरिका से शिकायत की है। इस्राईल का आरोप है कि लेबनानी सेना अपनी गतिविधियों का समन्वय हिज़्बुल्लाह के साथ कर रही है।
सऊदी चैनल ‘अल-हदथ’ ने कल लेबनान सरकार के एक सूत्र के हवाले से बताया कि बेरूत ने इस्राईल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए उस नक्शे पर आपत्ति जताई है, जिसमें दक्षिणी लेबनान के कुछ क्षेत्रों को इस्राईल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में शामिल दिखाया गया था।
लेबनान के इस सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस्राईल द्वारा दक्षिणी लेबनान की जमीन को अपने कब्जे वाले क्षेत्र में शामिल किए जाने का मुद्दा अब ‘रोम वार्ता के एजेंडे’ में शामिल हो गया है।
दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के अनुसार, लेबनान सरकार ने पूरे देश में हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले इस्राईल दक्षिणी लेबनान से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेगा, बशर्ते हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और उसके सैन्य ढांचे को नष्ट किए जाने की पुष्टि हो जाए।
इस समझौते के तहत लेबनानी सेना ने तीन गांवों—ज़ूतर अल-ग़रबिया (पश्चिमी ज़ूतर), सरिफ़ा और फ़रून—में प्रवेश किया है। इन गांवों को ‘पायलट क्षेत्रों’ या ‘प्रायोगिक क्षेत्रों’ के रूप में निर्धारित किया गया है। इस्राईल का कहना है कि लेबनानी सेना को इन गांवों में हिज़्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को नष्ट करना होगा और इस कार्रवाई को पूरा कराने की गारंटी एक तीसरे पक्ष द्वारा दी जानी चाहिए।
हालांकि, फ़रून और पश्चिमी ज़ूतर गांव मूल रूप से इस्राईल के क़ब्ज़े में थे ही नहीं। इन गांवों को ‘पायलट क्षेत्रों’ में शामिल किए जाने के फैसले का लेबनान के भीतर, विशेष रूप से इन गांवों के निवासियों ने, कड़ा विरोध किया है।
अब स्थिति यह है कि जिन गांवों पर इस्राईल का कब्जा ही नहीं था, उन्हें भी ‘पायलट क्षेत्रों’ में शामिल किए जाने के बावजूद इस्राईल इस योजना को आगे बढ़ाने और अपने क़ब्ज़े वाले इलाकों से पीछे हटने से बच रहा है।
इसी वजह से लेबनान और इस्राईल के बीच बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है और बेरूत ने निकट भविष्य में वार्ता के अगले दौर को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है।

