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इज़रायल ने लेबनान से वापसी के लिए शर्त रखी: हिज़्बुल्लाह को भंग किया जाए

इज़रायल ने लेबनान से वापसी के लिए शर्त रखी: हिज़्बुल्लाह को भंग किया जाए

इज़रायल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने एक बार फिर अपनी विस्तारवादी और आक्रामक सोच का परिचय देते हुए कहा है कि लेबनान से इज़रायली सेना की वापसी तभी संभव होगी जब हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह भंग कर दिया जाए। उन्होंने न केवल हिज़्बुल्लाह के हथियार छोड़ने की मांग की, बल्कि यह भी कहा कि इस संगठन को लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था से भी बाहर कर दिया जाना चाहिए।

स्मोट्रिच का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिज़्बुल्लाह को लेबनान के एक प्रभावशाली राजनीतिक और सामाजिक संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसे देश की बड़ी आबादी का समर्थन प्राप्त है। समर्थकों का मानना है कि हिज़्बुल्लाह ने वर्षों तक इज़रायली हमलों और कब्ज़े के विरुद्ध लेबनान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और दक्षिणी लेबनान की मुक्ति में उसका योगदान ऐतिहासिक रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि इज़रायल की यह मांग लेबनान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है। किसी स्वतंत्र देश की राजनीतिक संरचना में कौन-सा दल भाग लेगा या नहीं, इसका निर्णय बाहरी शक्तियाँ नहीं बल्कि उस देश की जनता करती है। ऐसे में हिज़्बुल्लाह को राजनीतिक और सैन्य रूप से समाप्त करने की शर्त को कई लोग अवास्तविक और दबाव की राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

स्मोट्रिच ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह किसी भी प्रकार की शक्ति बनाए रखेगा, इज़रायल लेबनान से पीछे नहीं हटेगा। आलोचकों के अनुसार यह बयान क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय और बढ़ाने वाला है। उनका मानना है कि स्थायी शांति की राह धमकियों और शर्तों से नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान, संप्रभुता के सम्मान और न्यायपूर्ण संवाद से निकलती है।

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