हिज़्बुल्लाह का लेबनान सरकार से संबोधन: कम से कम ज़ुबानी ही सही, इस्राईल की गुस्ताख़ी का जवाब दीजिए
लेबनान की संसद में “वफ़ादारी टू रेज़िस्टेंस” गुट के सदस्य अली अम्मार ने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाते हुए इस्राईल के “उकसावे और गुस्ताख़ी भरे बयानों” का जवाब दे।
उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख़ अपनाना इसलिए भी आवश्यक है ताकि लगातार रियायतें देने के कारण जो थोड़ी-बहुत साख शासक वर्ग की बची है, उसे भी पूरी तरह समाप्त होने से बचाया जा सके।
अली अम्मार ने कहा कि आज लेबनान की जनता चाहती है कि शासक वर्ग अपनी ग़लत नीतियों पर पुनर्विचार करे, उन निर्णयों से पीछे हटे जिनसे देश को कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि केवल लेबनान कमज़ोर हुआ और उसकी शक्ति के महत्वपूर्ण आधार छिन गए। उन्होंने सरकार से अपनी राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
लेबनान सरकार का इस्राईल के साथ समझौता आत्मसमर्पण का दस्तावेज़ है
“वफ़ादारी टू रेज़िस्टेंस” गुट के सदस्य ने कहा कि लेबनान सरकार और इस्राईल के बीच हुआ यह समझौता आत्मसमर्पण का दस्तावेज़ है तथा यह उन सभी लोगों के माथे पर कलंक है जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। उनके अनुसार यह समझौता लेबनान की संप्रभुता और युद्ध अपराधियों का पीछा करने तथा उन्हें न्याय के कटघरे में लाने के लेबनानी जनता के स्वाभाविक और वैध अधिकार से पीछे हटने के समान है।
लेबनान की संसद में हिज़्बुल्लाह से संबद्धित “वफ़ादारी टू रेज़िस्टेंस” गुट के सांसद हसन फ़ज़्लुल्लाह ने लेबनान की सरकार और इस्राईल के बीच हुए तथाकथित “फ़्रेमवर्क समझौते” पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता किसी भी प्रकार की कानूनी, संवैधानिक या धार्मिक वैधता नहीं रखता और इसे लागू नहीं किया जा सकता।
रूसिया अल-यौम के अनुसार, हसन फ़ज़्लुल्लाह ने इस समझौते के रणनीतिक परिणामों के प्रति चेतावनी देते हुए कहा कि यह इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए एक मुफ़्त सेवा के समान है।
उन्होंने लेबनान के सत्ताधारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसा समझौता किया है जिसमें लेबनान के राष्ट्रीय हितों के पक्ष में एक भी प्रावधान शामिल नहीं है।

