इराक़ सीमा पर अल-जूलानी गुट से जुड़े लड़ाके हाई अलर्ट पर, हथियारबंद तत्वों की तैनाती में इज़ाफ़ा
विभिन्न समाचार स्रोतों के अनुसार, दमिश्क़ पर नियंत्रण रखने वाले विद्रोही गुट के सरगना मुहम्मद अल-जूलानी से जुड़े सशस्त्र लड़ाकों को इराक़ की सीमा पर हाई अलर्ट पर रखा गया है। बताया जा रहा है कि सीमा से लगे कई क्षेत्रों में इन लड़ाकों की गतिविधियां तेज़ हो गई हैं और उन्हें किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक़, अल-जूलानी गुट ने सीमा चौकियों पर अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है तथा हथियारबंद तत्वों की तैनाती में भी इज़ाफ़ा किया है। इससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अल-जूलानी और उसका गुट लंबे समय तक कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े रहने और हिंसक गतिविधियों के आरोपों के कारण विवादों में रहा है। ऐसे में इराक़ सीमा पर उसकी सैन्य तैयारियों ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका को और गहरा कर दिया है।
हालांकि, इस सैन्य तैयारियों के उद्देश्य को लेकर अल-जूलानी गुट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
आतंकवाद को ट्रंप का खुला समर्थन
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि, डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया को तथाकथित “आतंकवाद का समर्थक देश” (State Sponsor of Terrorism) की सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलित्जर पुरस्कार विजेता अमेरिकी पत्रकार ग्लेन ग्रीनवाल्ड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि, सीरिया को इस सूची से बाहर निकलने के लिए अपने शासन की बागडोर ऐसे व्यक्ति को सौंपनी पड़ी, जो अल-कायदा का सदस्य और दाएश (आईएसआईएस) का सहयोगी रहा है।
सीरिया की वर्तमान शासक परिषद के प्रमुख मुहम्मद अल-जूलानी इससे पहले हयात तहरीर अल-शाम के प्रमुख रह चुके हैं। यह संगठन अल-कायदा से संबद्धित संगठनों में गिना जाता है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को औपचारिक सूचना भेजकर अपने उस निर्णय से अवगत कराया है, जिसके तहत सीरिया का नाम तथाकथित “आतंकवाद का समर्थक देशों” की सूची से हटाया जाएगा।

