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फ्रांस में प्रदर्शनकारियों को जेल की सजा, शनिवार से प्रदर्शनों पर प्रतिबंध

फ्रांस में प्रदर्शनकारियों को जेल की सजा, शनिवार से प्रदर्शनों पर प्रतिबंध

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सरकार की सख्ती तेज हो गई है। 217 प्रदर्शनकारियों को जेल की सजा सुनाई गई है, जबकि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, शनिवार से कई इलाकों में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है।

फार्स न्यूज एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता समूह के अनुसार, फ्रांस के न्याय मंत्री जेराल्ड दारमानिन ने हाल के दिनों में देश में हुए विरोध प्रदर्शनों और अशांति के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई को जेल की सजा सुनाए जाने की जानकारी दी है।

दारमानिन ने गुरुवार को पेरिस के बाहरी इलाके में स्थित फ्लूरी-मेरोजिस जेल के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि 217 प्रदर्शनकारियों को दंगा करने, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में जेल की सजा सुनाई गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह फ्रांस में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने 2,700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 1,000 से ज्यादा लोगों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालतों में पेश किया गया।

फ्रांस के न्याय मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में जेल की सजा पाने वालों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि सरकारी अभियोजक और न्यायाधीश ऐसे लोगों को भी जेल भेज रहे हैं, जिनका इससे पहले न्याय व्यवस्था से कोई परिचय नहीं था और जिन्हें गंभीर अपराधी माना जाता है।”

दारमानिन ने दावा किया कि फ्रांस की न्याय व्यवस्था बेहद सख्ती से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके और ऐसी कार्रवाई भविष्य में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए निवारक साबित हो।

हालांकि, उनकी इन टिप्पणियों की फ्रांस के कुछ वकीलों ने आलोचना की है। समाचार वेबसाइट सीएनए के अनुसार, आलोचकों ने देश की न्यायिक व्यवस्था पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है।

फ्रांस भी यूरोप के कई अन्य देशों की तरह जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या का सामना कर रहा है। हालांकि, न्याय मंत्री का कहना है कि इसका समाधान कैदियों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि जेलों में अधिक जगह उपलब्ध कराना है।

फ्रांस के न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष सितंबर की शुरुआत तक देश की जेलों में उनकी निर्धारित क्षमता से लगभग 30,000 अधिक कैदी बंद थे।

पेरिस में रात के समय आवाजाही पर प्रतिबंध

इसी बीच, पेरिस पुलिस ने घोषणा की है कि 22 से 25 अक्टूबर (30 अक्टूबर के बजाय 30 मेहर से 3 आबान के बीच) शहर के दो इलाकों में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाजाही पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

पेरिस पुलिस के मुताबिक, यह फैसला फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरां नूनेज के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

दूसरी ओर, खबरों के अनुसार, शनिवार को होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता हेतु पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु अधिकारियों को भी स्वेच्छा से ड्यूटी देने के लिए बुलाया जाएगा।

बीएफएम टीवी नेटवर्क ने इस संबंध में बताया कि राष्ट्रीय पुलिस प्रशासन ने पुलिस अकादमियों, अधिकारियों और कमिश्नरों से उन प्रशिक्षु अधिकारियों को स्वयंसेवक के रूप में भेजने के लिए कहा है, जो अपना प्रशिक्षण पूरा कर रहे हैं। इन प्रशिक्षुओं को देश के विभिन्न हिस्सों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैनात किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक दर्जनों प्रशिक्षु अधिकारी स्वेच्छा से ड्यूटी देने के लिए तैयार हो चुके हैं। हालांकि, वे प्रदर्शनकारियों के साथ सीधे टकराव वाले स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे, क्योंकि वर्ष 2022 से फ्रांस के कानून में इस पर प्रतिबंध है।

इसके बजाय, उन्हें सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा और पुलिस थानों में प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि अनुभवी पुलिस अधिकारियों को विरोध प्रदर्शनों वाले इलाकों में तैनात किया जा सके।

मार्सिले समेत पूरे क्षेत्र में शनिवार के प्रदर्शन प्रतिबंधित

फ्रांस के विभिन्न शहरों में सख्त सुरक्षा उपायों के बीच मीडिया ने खबर दी है कि शनिवार, 24 अक्टूबर को बouches-द्यू-रोन प्रांत के पूरे क्षेत्र में किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। इस प्रतिबंध में मार्सिले शहर भी शामिल है।

ये फैसले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के गुरुवार को दिए गए उस बयान के बाद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि शनिवार से ऐसे सभी प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, जिनका आयोजन श्रमिक संघों द्वारा नहीं किया गया हो।

फ्रांस के राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मैक्रों ने कहा, “ऐसे सभी मामलों में, जहां उन लोगों की ओर से प्रदर्शन या सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी जाती है, जिनके पास ऐसा करने का कोई कानूनी आधार नहीं है, वहां प्रांतीय प्रशासन के प्रमुख ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाएंगे।”

हालांकि, उन्होंने श्रमिक संगठनों और ट्रेड यूनियनों की ओर से प्रदर्शन आयोजित करने के अनुरोधों पर भी शर्तें लगाईं। मैक्रों ने कहा कि ऐसे अनुरोधों की मौजूदा कानूनों के अनुसार संबंधित क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी।

जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ शुरू हुए थे प्रदर्शन

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सितंबर के मध्य में हुई थी। उस समय पेरिस के बाहरी इलाकों में हाई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति में सुधार की मांग की थी।

बाद में जीवनयापन की बढ़ती लागत से परेशान लोग भी इन प्रदर्शनों में शामिल हो गए। इसके बाद आंदोलन धीरे-धीरे देश के अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों में लगभग 5 लाख 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया है।

प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, बेहोश करने वाले हथगोले और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया है।

इस बीच, सरकार ने गिरफ्तारियों, त्वरित सुनवाई, जेल की सजा और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाकर आंदोलन को नियंत्रित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

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