यमन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के उप प्रमुख अली हमूद अल-मूशकी ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि इस्राईल की कथित सैन्य उपस्थिति सोमालीलैंड में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
यह बयान उन्होंने यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि के सैन्य सलाहकार के साथ हुई एक बैठक के दौरान दिया।
अल-मूशकी ने चेतावनी दी कि यदि
इस्राईल की उपस्थिति सोमालीलैंड में बढ़ती है, तो यह कदम क्षेत्र में तनाव को और तेज कर सकता है। उन्होंने इसे “सैन्य प्रकृति की गतिविधि” बताया, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
यमन के सैन्य अधिकारी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की स्थिति का असर समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे लाल सागर में जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, वहीं अरब सागर की समुद्री सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है जिस से वैश्विक व्यापार मार्गों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
यमन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि इस स्थिति पर गंभीरता से नजर रखी जाए ताकि क्षेत्र में संघर्ष न बढ़े।
यमन की चेतावनी ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व और अफ्रीका के हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका क्षेत्र में सुरक्षा हालात पहले से ही संवेदनशील हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव बढ़ता है, तो इसका प्रभाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।
यमन की चेतावनी, सोमालीलैंड में इस्राईल की मौजूदगी से तनाव बढ़ने की आशंका

