Site icon ISCPress

अमेरिकी प्रस्ताव सूडान के विभाजन का गहरा षड्यंत्र, आरएसएफ को शहरों से हटाने की मांग 

अफ्रीका : सूडान के संप्रभु परिषद के उपाध्यक्ष मालिक एक़ार अल-जज़ीरा से बातचीत में अमेरिका के युद्ध समाप्त करने के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सूडान को इस प्रस्ताव को लेकर कुछ आशंकाएं हैं। सरकार को डर है कि यह पहल ऐसी स्थिति को स्थायी बना सकती है, जिससे आगे चलकर सूडान के विभाजन का रास्ता खुल सकता है।

एकार ने कहा कि सूडान सरकार पर अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार करने का काफी दबाव है, लेकिन सरकार अभी भी अपने रुख पर कायम है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार के सामने सैन्य समाधान का विकल्प है। हालांकि, अगर बातचीत के लिए गंभीर और उचित परिस्थितियां बनती हैं, तो बातचीत की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

एक़ार के मुताबिक, किसी भी बातचीत की शुरुआत से पहले रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के लड़ाकों को शहरों और रिहायशी इलाकों से बाहर जाना होगा। इसके बाद उन्हें तय इलाकों में इकट्ठा करने और हथियार डालने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।

उन्होंने साफ किया कि सूडान सरकार बातचीत के खिलाफ नहीं है। सरकार अलग-अलग शांति प्रस्तावों पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन इसकी शर्त है कि सूडान की एकता और सरकारी संस्थाओं की सुरक्षा बनी रहे।

एक़ार ने कहा कि सरकार युद्ध खत्म करने की किसी भी पहल को सकारात्मक नजरिए से देखती है, लेकिन वह देश की संप्रभुता और सरकार से जुड़े अपने मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई राजनीतिक समझौता होता है, तो उसके बाद एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी। यह सरकार देश में चुनाव कराने के लिए जरूरी माहौल तैयार करेगी।

मालिक एकार ने इथियोपिया पर आरोप लगाया कि उसने RSF को अपनी जमीन का इस्तेमाल सूडान पर हमले के लिए करने की अनुमति दी। उनके अनुसार, इस वजह से सूडान और इथियोपिया के बीच संबंधों का स्तर कम हुआ है।

RSF से अलग होकर सेना के साथ काम कर रहे लड़ाकों के बारे में उन्होंने कहा कि वे अब सेना की कमान में हैं। अगर उन पर किसी तरह के अपराध या उल्लंघन के आरोप हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सूडान में सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच लंबे समय से भीषण लड़ाई चल रही है। इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग अपना घर छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं।

Exit mobile version