विश्व यहूदी कांग्रेस के अध्यक्ष: नेतन्याहू दोबारा चुने गए तो इस्राईल को भारी नुकसान होगा
विश्व यहूदी कांग्रेस के अध्यक्ष और इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व सलाहकार रोनाल्ड लॉडर ने इस्राईलियों को चेतावनी दी है कि, यदि नेतन्याहू दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो इस्राईल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह बात इस्राईली अख़बार ‘हारेत्ज़’ को दिए एक साक्षात्कार में कही।
रोनाल्ड लॉडर ने कहा, “अगर भविष्य में बेन ग्विर और स्मोट्रिच की पार्टियाँ सरकार में किसी भी तरह की भूमिका निभाती हैं, तो इस्राईल की विफलता तय है।”
जब लॉडर से पूछा गया कि वह किसे वोट देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह मतदान नहीं करेंगे, क्योंकि वह मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से बेहद नाराज़ हैं। हालाँकि, अगर उन्हें किसी एक उम्मीदवार को चुनना पड़ा, तो वह येश अतिद पार्टी के नेता गादी आइज़ेनकोट को वोट देना पसंद करेंगे।
नेतन्याहू के साथ पुराने रिश्तों पर भी बोले लॉडर
रोनाल्ड लॉडर ने नेतन्याहू के साथ अपने पुराने संबंधों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि एक समय दोनों के बीच बेहद करीबी संबंध थे, लेकिन बाद में इन रिश्तों में कड़वाहट आ गई।
उन्होंने 1990 के दशक में इस्राईल और सीरिया के बीच बातचीत में मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका को याद करते हुए कहा कि उस समय नेतन्याहू संभावित समझौते के तहत गोलान की पहाड़ियों को छोड़ने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रुख बदल लिया।
लॉडर ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि उन्होंने शांति को प्राथमिकता देने के बजाय अपने राजनीतिक भविष्य को अधिक महत्व दिया।
इस्राईल ने यूरोप ही नहीं, विदेशों में रहने वाले यहूदियों का भरोसा भी खोया।
लॉडर ने कहा कि आज इस्राईल बेहद कठिन स्थिति में है। उन्होंने कहा, “इस्राईल ने केवल यूरोप और अन्य जगहों पर अपना समर्थन नहीं खोया है, बल्कि विदेशों में रहने वाले यहूदियों का समर्थन भी खो दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हें ऐसा महसूस नहीं होता कि इस्राईल उनकी रक्षा कर रहा है।”
लॉडर ने इस्राईल और अमेरिका के बीच संबंधों में लगातार आ रही गिरावट पर भी गहरी चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “मेरा इस्राईल लौटने का कोई इरादा नहीं है। वहाँ हर जगह छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते रहते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वहाँ रहना नहीं चाहते।
नेतन्याहू की सुरक्षा नीति पर भी उठे सवाल
इससे पहले इज़राइली अखबार ‘मआरिव’ ने नेतन्याहू द्वारा इस्राईल की सुरक्षा संबंधी अवधारणा के लिए पेश किए गए 10 बिंदुओं की आलोचना की थी। अखबार ने उनकी घोषणाओं और ज़मीनी वास्तविकता के बीच बड़े अंतर को उजागर किया था।

