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अमेरिका ने देर से माना: ‘समूद फ़्लीट’ पर हमला इज़रायल ने किया था

अमेरिका ने देर से माना: ‘समूद फ़्लीट’ पर हमला इज़रायल ने किया था

ट्यूनीशिया के बंदरगाह Sidi Bou Said में खड़े वैश्विक समूद फ़्लीट के दो जहाज़ों पर हुए हमले के लगभग एक महीने बाद अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने दावा किया है कि यह कार्रवाई इज़रायल ने की थी और इसकी मंज़ूरी स्वयं इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 8 और 9 सितंबर को इज़रायल ने एक गुप्त सैन्य अभियान के तहत पनडुब्बी से ड्रोन और आग लगाने वाले विस्फोटकों का उपयोग किया। इन हमलों में समूद फ़्लीट के दो जहाज़ों को निशाना बनाया गया, जो कथित रूप से फ़िलिस्तीन के समर्थन और ग़ाज़ा की नाकेबंदी के विरोध से जुड़े अभियानों में भाग लेने वाले थे।

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि यह अभियान अत्यंत गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया और इसका उद्देश्य उन समुद्री गतिविधियों को रोकना था जिन्हें इज़रायल अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानता है। हमले के समय किसी बड़े मानवीय नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन जहाज़ों को गंभीर क्षति पहुँचने की बात कही गई है।

इस खुलासे के बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि किसी संप्रभु देश के बंदरगाह में खड़े जहाज़ों पर बिना अनुमति हमला किया गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है। वहीं इज़रायल की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की प्रतीक्षा की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि “समूद” (अरबी में दृढ़ता या अडिग रहने का प्रतीक) नाम से चलने वाले अभियानों को आमतौर पर फ़िलिस्तीनी जनता के समर्थन और ग़ाज़ा पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण यह घटना मध्य पूर्व की राजनीति और क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।

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