सोनिया जी के नेतृत्व में दूरदराज के गांव से आकर नरसिम्हा राव पीएम बने: रेवंत रेड्डी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की एक पुरानी तस्वीर साझा करने वाली पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1990 के दशक की ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर शेयर की थी जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे दिखाई दे रहे थे। दिग्विजय सिंह ने लिखा कि यह संगठन की ताकत है कि कार्यकर्ता नेताओं को जमीन से उठाकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनाते हैं। उन्होंने इसे पार्टी नेतृत्व के लिए एक परोक्ष संदेश माना, क्योंकि पोस्ट में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को टैग किया गया था।
इस पोस्ट के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया। कई नेताओं ने इसे पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी पर तंज़ के रूप में देखा। विवाद बढ़ने पर दिग्विजय ने सफाई दी कि उन्होंने केवल संगठन की ताकत की तारीफ की है और आरएसएस-भाजपा की विचारधारा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि वे आरएसएस और मोदी सरकार के नीतियों के विरोधी रहे हैं और रहेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी प्रतिक्रिया दी कि “गोडसे के समर्थक गांधी के समर्थक नहीं हो सकते।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिना नाम लिए आरएसएस पर निशाना साधा, जबकि सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय का समर्थन किया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी, लेकिन उन्होंने दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने लिखा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में सेवा, समर्पण और नैतिकता की झलक मिलती है। उनके नेतृत्व में तेलंगाना के एक दूरदराज के गांव से सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी ने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को भी प्रधानमंत्री बनाया। उनका यह संदेश कांग्रेस में योग्यता आधारित नेतृत्व की याद दिलाने वाला कदम माना गया।
कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (CWC) की बैठक के दौरान राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह की मुलाकात भी चर्चा में रही। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में दिग्विजय से कहा, “कल आपने बदमाशी कर दी,” जिस पर सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने हंसी में प्रतिक्रिया दी।
भाजपा ने इस अवसर का फायदा उठाया। प्रवक्ता सीआर केसवन ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह के बयान ने कांग्रेस की ‘पहली परिवार’ वाली कार्यशैली उजागर कर दी। भाजपा ने इसे कांग्रेस में आंतरिक कलह का प्रमाण बताया। यह विवाद दिग्विजय सिंह के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि हाल ही में उनके अन्य बयानों पर भी पार्टी में असहमति जताई गई थी। कुल मिलाकर यह मामला कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरियों और पार्टी के अंदरूनी मतभेद को उजागर करता है, साथ ही भाजपा के लिए राजनीतिक लाभ का अवसर भी बन गया है।

