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ट्रंप के “फ्रीडम प्रोजेक्ट” के बाद हॉर्मुज़ व्यवहारिक रूप से और अधिक बंद हो गया है: ब्लूमबर्ग

ट्रंप के “फ्रीडम प्रोजेक्ट” के बाद हॉर्मुज़ व्यवहारिक रूप से और अधिक बंद हो गया है: ब्लूमबर्ग

लगभग तीस दिन बीत चुके हैं उस अमेरिकी समुद्री घेराबंदी को, जिसका उद्देश्य ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मजबूर करना था। लेकिन जब इस घेराबंदी से कोई परिणाम नहीं निकला, तो पिछले सोमवार ट्रंप ने घोषणा की कि फंसे हुए जहाज़ों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से निकालने के लिए “ऑपरेशन आज़ादी” शुरू किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी रक्षामंत्री द्वारा इस अभियान को सफल बताए जाने के कुछ ही घंटों बाद इसे रोक दिया गया।

समुद्री यातायात की निगरानी से प्राप्त आंकड़ों से पता चला कि जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए कतार में खड़े सभी 33 जहाज़, दो जहाज़ों के चट्टानों के बीच फंस जाने और एक फ़्रांसीसी जहाज़ को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद, वापस मुड़ गए और जलडमरूमध्य से दूर हट गए।

ब्लूमबर्ग ने ज़ोर देकर कहा है कि इस अभियान के अगले ही दिन से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य व्यावसायिक समुद्री आवागमन के लिए व्यवहारिक रूप से बंद बना हुआ है, जबकि ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संगठन ने भी हॉर्मुज़ की स्थिति को अब तक गंभीर और संकटपूर्ण बताया है।

समुद्री यातायात के आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि, हालात सुधरने के बजाय और अधिक जटिल हो गए। तंगे से गुजरने की प्रतीक्षा कर रहे दर्जनों जहाज़ों का वापस लौट जाना यह संकेत देता है कि सैन्य दबाव की नीति ने क्षेत्र में स्थिरता लाने के बजाय अनिश्चितता और भय का माहौल बढ़ाया। आलोचकों का कहना है कि संवाद और कूटनीति के स्थान पर शक्ति-प्रदर्शन को प्राथमिकता देने की नीति ने संकट को और गहरा किया।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके असर ने भी ट्रंप प्रशासन की नीति पर आलोचना तेज कर दी है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक का व्यावसायिक जहाज़रानी के लिए व्यवहारिक रूप से ठप पड़ जाना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक संतुलन के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में कई विश्लेषक मानते हैं कि हॉर्मुज़ प्रकरण ने यह दिखा दिया कि केवल दबाव और टकराव की नीति हर संकट का समाधान नहीं हो सकती।

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