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जेराल्ड फोर्ड एक बार फिर मरम्मत के लिए पश्चिम एशिया से बाहर जाएगा

जेराल्ड फोर्ड एक बार फिर मरम्मत के लिए पश्चिम एशिया से बाहर जाएगा

अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट (The Washington Post) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford आने वाले दिनों में मरम्मत के लिए पश्चिम एशिया के क्षेत्र से बाहर चला जाएगा।

अमेरिकी अधिकारियों ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि यह युद्धपोत 10 महीने की अभूतपूर्व तैनाती पूरी करने के बाद जल्द ही मध्य पूर्व क्षेत्र से निकलकर संयुक्त राज्य अमेरिका रवाना होगा, जहाँ इसकी मरम्मत और रखरखाव का काम किया जाएगा। यह तैनाती 300 दिनों से अधिक चली, जो हाल के दशकों में अमेरिकी नौसेना के सबसे लंबे अभियानों में गिनी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस लंबे अभियान के दौरान पोत के कई अहम सिस्टम पर भारी दबाव पड़ा। लगातार समुद्री अभियान, युद्धक विमानों की उड़ानें, हथियार प्रणालियों का उपयोग और चालक दल पर बढ़ते बोझ के कारण अब इसकी मरम्मत टालना संभव नहीं रह गया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि जहाज़ को कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिनमें आंतरिक सुविधाओं और परिचालन ढाँचे से जुड़ी समस्याएँ भी शामिल हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट का दावा है कि इस पोत को व्यापक मरम्मत की सख्त ज़रूरत है। इसके क्षेत्र से हटने के बाद ऐसे समय में, जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ईरान के साथ तनाव में उलझा हुआ है, क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मारक क्षमता में स्पष्ट रूप से कमी आ सकती है।

हालांकि अमेरिका के अन्य युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन फोर्ड जैसे अत्याधुनिक परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत की मौजूदगी का रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव अलग माना जाता है। इसके हटने से क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और अमेरिकी सैन्य दबाव की तस्वीर में कुछ बदलाव आ सकता है।

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