अली अल-ताहिर इलाक़े में चार महीने तक जारी रहा प्रतिरोध: हिज़्बुल्लाह
लेबनान की संसद में हिज़्बुल्लाह से जुड़े संसदीय गुट ‘वफ़ादारी टू द रेज़िस्टेंस’ के प्रमुख मुहम्मद राद ने दावा किया है कि हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों ने ‘अली अल-ताहिर’ इलाके में चार महीने तक प्रतिरोध जारी रखा। उन्होंने कहा कि इस दौरान क्षेत्र को ज़मीन और हवा, दोनों तरफ़ से पूरी तरह घेर लिया गया था और हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों को बड़े पैमाने पर विस्फोटकों, तोपखाने की गोलाबारी और हवाई हमलों का सामना करना पड़ा।
मुहम्मद राद ने अली अल-ताहिर में हुई लड़ाइयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बेहद कठिन परिस्थितियों और लगातार हमलों के बावजूद हिज़्बुल्लाह ने चार महीने तक अपना प्रतिरोध जारी रखा। राद ने कहा कि, विरोधी पक्ष और उसके साथ सहयोग करने वाली ताक़तों को उम्मीद थी कि प्रतिरोध आत्मसमर्पण कर देगा, लेकिन उनकी यह गणना विफल रही।
उन्होंने कहा, “उन्हें उम्मीद थी कि प्रतिरोध आत्मसमर्पण कर देगा, लेकिन दुश्मन, उसके सहयोगियों और उन शक्तिशाली पक्षों की गणना विफल हो गई, जो यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि प्रतिरोध को ‘फ़्रेमवर्क समझौते’ के चरणों को लागू करने की व्यवस्था में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सकेगा।”
मुहम्मद राद ने अली अल-ताहिर में हुई लड़ाई से मिले सबक़ को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह क्षेत्र दुश्मन का लगातार सामना करने और प्रतिरोध की रणनीति को समझने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण अनुभव प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि इस्राइली, अली अल-ताहिर से जुड़े रहस्यों और उसके अज्ञात पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करेंगे। लेकिन चूँकि हम नहीं चाहते कि दुश्मन और उसके सहयोगी इन रहस्यों को समझ सकें, इसलिए उस समय हमने अस्पष्टता की नीति बनाए रखना उचित समझा।”
राद ने आगे कहा कि भविष्य में अली अल-ताहिर में प्रतिरोध बलों की क्षमता और उनके अभियानों को दिए गए समर्थन तथा उनके साथ किए गए समन्वय के कई पहलू सामने आएँगे।
प्रतिरोध के हथियारों पर क्या कहा?
हिज़्बुल्लाह के हथियारों और लेबनान की रक्षा व्यवस्था में प्रतिरोध की भूमिका के सवाल पर मुहम्मद राद ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कुछ शर्तों का पूरा होना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा, “जब दुश्मन लेबनान की ज़मीन से पीछे हट जाएगा, अपने हमले बंद कर देगा और लेबनानी सेना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के प्रावधानों को लागू करने के लिए लितानी नदी के दक्षिण में तैनात हो जाएगी, तब हथियारों के एकाधिकार और राष्ट्रीय रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका पर विचार करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ तैयार होंगी।”
उन्होंने कहा कि इसके बाद एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति पर चर्चा की जा सकती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि राष्ट्रीय रक्षा में प्रतिरोध की क्या भूमिका होगी और हथियारों के मुद्दे को किस तरह संबोधित किया जाएगा। राद के अनुसार, इस प्रक्रिया में मौजूद बाधाएँ भी उस समय दूर हो जाएँगी।
लेबनान में हिज़्बुल्लाह के हथियारों और राष्ट्रीय रक्षा में उसकी भूमिका का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। मुहम्मद राद के ताज़ा बयान में इस मुद्दे को इस्राइली सेना की वापसी, हमलों की समाप्ति और लेबनानी सेना की लितानी नदी के दक्षिण में तैनाती से जोड़ा गया है।

