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नाटो ने ईरान के ख़िलाफ़ कोई सैन्य मदद नहीं की: डोनाल्ड ट्रंप 

नाटो ने ईरान के ख़िलाफ़ कोई सैन्य मदद नहीं की: डोनाल्ड ट्रंप 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) देशों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि ईरान के खिलाफ चल रहे तनाव और टकराव के दौरान उन्हें सहयोगी देशों से कोई ठोस सैन्य समर्थन नहीं मिला। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने इस पूरे मामले में अकेले ही मोर्चा संभाला, जबकि नाटो सदस्य देश तमाशबीन बने रहे।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर एक तीखा संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने बड़े अक्षरों में लिखते हुए नाटो की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने ईरान को “पागल देश” बताते हुए दावा किया कि अब वह सैन्य रूप से काफी कमजोर हो चुका है, और इस स्थिति तक पहुँचाने में अमेरिका की निर्णायक भूमिका रही है।

उन्होंने आगे कहा कि, नाटो जैसे गठबंधन का उद्देश्य ही सामूहिक सुरक्षा और सहयोग है, लेकिन जब वास्तविक चुनौती सामने आई तो अधिकांश सदस्य देशों ने सक्रिय भागीदारी से दूरी बना ली। इस बात को लेकर ट्रंप ने स्पष्ट नाराज़गी जताई और संकेत दिया कि अमेरिका को अपने सहयोगियों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

अपने बयान में ट्रंप ने यह भी जताने की कोशिश की कि अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति के दम पर अकेले भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। उन्होंने लिखा कि “अमेरिका को नाटो की ज़रूरत नहीं है”, हालांकि साथ ही यह भी जोड़ा कि इस पूरे घटनाक्रम को एक “महत्वपूर्ण मोड़” के रूप में याद रखा जाना चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान न केवल नाटो के भीतर मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच रणनीतिक सोच में अंतर बढ़ता जा रहा है।

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