इज़रायली संसद का प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून पर घातक प्रहार है: ईरान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इज़राइल की संसद (कनेसेट) द्वारा पारित उस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है, जिसमें फ़िलिस्तीनी कैदियों को मृत्युदंड देने की अनुमति देने की बात कही गई है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ एक गंभीर और अभूतपूर्व कदम बताया।
बकाई ने कहा कि यह निर्णय 1949 के जेनेवा कन्वेंशनों, विशेष रूप से साझा अनुच्छेद 3, का स्पष्ट उल्लंघन है। यह अनुच्छेद युद्ध या संघर्ष की स्थिति में बंदियों और गैर-लड़ाकों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने पर जोर देता है। उनके अनुसार, इस तरह का कानून न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना है, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार व्यवस्था को भी कमजोर करता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह कदम मानव सभ्यता को पीछे की ओर धकेलने वाला है और इसे “जंगल के कानून” की ओर वापसी करार दिया। बकाई के मुताबिक, इस तरह के फैसले हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा देंगे और क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और गंभीर बना सकते हैं।
ईरानी प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इज़राइल द्वारा लगातार किए जा रहे कथित कानून उल्लंघनों और कार्रवाईयों के बावजूद वैश्विक स्तर पर प्रभावी प्रतिक्रिया का अभाव चिंताजनक है। उनके अनुसार, यदि ऐसे कदमों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ेगा।
अंत में, बकाई ने वैश्विक संस्थाओं और मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाएं और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

