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क्या अमेरिका अरब देशों के लिए ईरान की संपत्तियों को लूटने की योजना बना रहा है?

क्या अमेरिका अरब देशों के लिए ईरान की संपत्तियों को लूटने की योजना बना रहा है?

एबीसी न्यूज़ की वरिष्ठ संवाददाता सेलिना वांग ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया है कि अमेरिकी प्रशासन एक ऐसी योजना तैयार कर रहा है, जिसके तहत ईरान की संपत्तियों का उपयोग खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के पुनर्निर्माण और उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन संपत्तियों पर विचार किया जा रहा है उनमें विदेशों में जमी हुई ईरानी वित्तीय परिसंपत्तियाँ तथा वे जहाज़ भी शामिल हैं जिन्हें पहले अमेरिका द्वारा जब्त किया जा चुका है।

बताया गया है कि अमेरिकी सरकार इस समय खाड़ी क्षेत्र के अपने अरब सहयोगी देशों के साथ परामर्श कर रही है और उनसे हुए नुकसान तथा पुनर्निर्माण की लागत का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने को कहा है।

सूत्र के मुताबिक, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपनी टीम को क्षेत्रीय देशों की स्थिति का अध्ययन करने और उन नुकसानों की भरपाई के लिए आवश्यक खर्च का व्यापक अनुमान तैयार करने का निर्देश दिया है, जिन्हें वाशिंगटन का दावा है कि संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान की गतिविधियों के कारण हुआ है।

यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो यह ईरान की विदेशी संपत्तियों को लेकर अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद कदम माना जा सकता है।

यदि यह योजना लागू होती है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों पर एक गंभीर प्रहार माना जाएगा। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका वर्षों से आर्थिक प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाता रहा है और अब वह ईरानी संपत्तियों को अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के हित में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन ने अपने अरब सहयोगी देशों से युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। विरोधियों का आरोप है कि जिन देशों ने अमेरिकी नीतियों का समर्थन किया और क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ावा दिया, उन्हें अब ईरान की संपत्तियों से आर्थिक लाभ पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। इसके माध्यम से अमेरिका एक ओर अपने अरब सहयोगियों को संतुष्ट करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। आलोचकों के अनुसार, जिन अरब सरकारों ने क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतियों का समर्थन किया है, वे भी इस योजना के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से ईरानी संपत्तियों पर दावा करने की स्थिति में आ सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी संप्रभु देश की संपत्तियों को उसकी सहमति के बिना तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है। यदि आज ईरान की संपत्तियों के साथ ऐसा किया जाता है, तो भविष्य में किसी भी स्वतंत्र देश की विदेशी परिसंपत्तियाँ राजनीतिक दबाव का साधन बन सकती हैं।

इस प्रस्ताव ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर काम कर रहा है या अपनी राजनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का उपयोग कर रहा है।

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