अमेरिका की धमकी भरी बयानबाज़ी के सामने ईरान चुप नहीं बैठेगा: लारीजानी
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने स्पष्ट किया है कि, इस्लामी गणराज्य ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। अमेरिका की लगातार धमकी भरी बयानबाज़ी और दबाव की नीति ने न केवल क्षेत्र में अस्थिरता पैदा की है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति के मूल सिद्धांतों पर भी सवाल उठाए हैं।
दबाव, प्रतिबंध और धमकियों के आधार पर बातचीत संभव नहीं
स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गैब्रियल लोशिंगर से फोन पर बातचीत के दौरान अली लारीजानी ने कहा कि ईरान हमेशा शांतिपूर्ण समाधान और तनाव कम करने के पक्ष में रहा है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि वह अमेरिका की धमकी और दबाव के सामने चुप बैठेगा। ईरान का संदेश स्पष्ट है: सम्मान और बराबरी के आधार पर बातचीत संभव है, लेकिन दबाव, प्रतिबंध और धमकियों के जरिए नहीं।
स्विट्ज़रलैंड की सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना
लारीजानी ने स्विट्ज़रलैंड के सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह देश हमेशा संकटों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में जिम्मेदार कर्तव्य निभाता रहा है। ईरान इस रुख की कद्र करता है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका अपनी एकतरफा नीतियों और आक्रामक बयानबाज़ी के जरिए क्षेत्र की स्थिति को और अस्थिर कर रहा है।
वहीं, स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी बातचीत में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में तनाव कम करना बेहद जरूरी है और अपने देश की ओर से पूरी तत्परता और रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा जताई।
इस पूरी वार्ता से यह साफ हो जाता है कि ईरान शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, सम्मान और राजनीतिक स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं करेगा। अमेरिका को यह समझना होगा कि धमकी और दबाव की नीति अब पुरानी और असफल साबित हो चुकी है। अगर वास्तव में शांति और स्थिरता चाहिए, तो केवल बराबरी, सम्मान और संवाद ही रास्ता है; बाकी सब सिर्फ शोर है।

