हंगरी के नए प्रधानमंत्री ने नेतन्याहू की गिरफ्तारी के संकेत दिए
हंगरी के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री ने एक अहम बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करेगा। उन्होंने कहा कि यदि इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मजारिस्तान की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू करना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी होगी।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर रखी है। मजारिस्तान, ICC का सदस्य देश होने के नाते, उसके आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है।
खबरों के अनुसार, नेतन्याहू इस साल के अंत तक हंगरी की यात्रा की योजना बना रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है, तो यह यूरोप में एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक परीक्षण बन सकता है।
मिलान में तेल अवीव के साथ संबंधों के विरोध में प्रदर्शन
मिलान में सैकड़ों लोगों ने शहर के केंद्र में जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध शहर प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें तेल अवीव के साथ ‘सिस्टर सिटी’ (बहन शहर) संबंध को बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस तरह के सांस्कृतिक और प्रशासनिक संबंध जारी रखना उचित नहीं है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मांग की कि इस समझौते को तुरंत समाप्त किया जाए।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। इस मुद्दे ने इटली में भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जहां कुछ लोग इस संबंध को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विरोध यूरोप में बढ़ती जनभावनाओं को दर्शाते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और स्थानीय नीतियों पर भी असर डाल रहे हैं।

