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कनाडा ने “समूद” कार्यकर्ताओं के साथ इज़रायल की बर्बर बदसलूकी की कड़ी निंदा की

कनाडा ने “समूद” कार्यकर्ताओं के साथ इज़रायल की बर्बर बदसलूकी की कड़ी निंदा की

इज़रायल द्वारा “समूद” काफिले के शांति कार्यकर्ताओं के साथ किया गया अमानवीय व्यवहार एक बार फिर यह साबित करता है कि ज़ायोनी शासन मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहा है। जिन लोगों का उद्देश्य केवल शांति, मानवाधिकार और फ़िलिस्तीनी जनता के समर्थन की आवाज़ उठाना था, उन्हें हिरासत में लेकर उनके साथ क्रूरता करना इज़रायल के दमनकारी चेहरे को दुनिया के सामने उजागर करता है।

कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand अनिता आनंद ने भी इस घटना पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि, कनाडाई नागरिकों के साथ हुई यह बदसलूकी अत्यंत भयावह और अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि इज़रायल में गिरफ़्तार किए गए कनाडाई कार्यकर्ताओं को रिहा होने के बाद तुर्किये भेजा गया है, जहाँ उन्हें चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल कुछ कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि उन सभी आवाज़ों को दबाने की कोशिश है जो फ़िलिस्तीनियों पर हो रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ उठती हैं। इज़रायल लंबे समय से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राहत संगठनों को निशाना बनाता रहा है, ताकि ग़ाज़ा और अन्य फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में हो रहे अत्याचारों की सच्चाई दुनिया तक न पहुँच सके।

दुनिया भर में इस घटना के बाद इज़रायल की आलोचना तेज़ हो गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा और अपमानजनक व्यवहार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का सीधा उल्लंघन है। कई देशों में जनता ने भी इज़रायल की नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए मांग की है कि ज़ायोनी शासन को उसके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इज़रायल का यह रवैया उसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना और अलगाव को और तेज़ करेगा। जिस प्रकार अब पश्चिमी देशों के अधिकारी भी खुलकर नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं, उससे यह संकेत मिलता है कि इज़रायल की कार्रवाइयों को लेकर वैश्विक धैर्य धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।

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