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जब तक मैं सत्ता में हूं, चीन ताइवान के ख़िलाफ़ क़दम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा: ट्रंप

जब तक मैं सत्ता में हूं, चीन ताइवान के ख़िलाफ़ क़दम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन यात्रा से लौटने के तुरंत बाद फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में चीन, ताइवान और ईरान को लेकर कई तीखे बयान दिए। ट्रंप ने दावा किया कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक चीन ताइवान के खिलाफ कोई सैन्य कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि बीजिंग जानता है कि उनकी सरकार किसी भी आक्रामक कार्रवाई का कड़ा जवाब दे सकती है।

ट्रंप ने इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ भी कड़ा रुख दिखाया और कहा कि अमेरिका को ईरान से जुड़े मामलों में किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि चीन के नेताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कर दिया था कि वॉशिंगटन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। ट्रंप के अनुसार, चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है और यही कारण है कि इस क्षेत्र की स्थिरता उसके लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए तेल की कीमतों में भारी वृद्धि तक स्वीकार करने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि यदि तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती, तब भी अमेरिका अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटता। ट्रंप ने इसे वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए कहा कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना जरूरी है।

ट्रंप ने यूरोप का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने सहयोगियों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़ा बोझ उठाया है। उन्होंने माना कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह केवल अस्थायी स्थिति है। उनके अनुसार, अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला रहे और वैश्विक व्यापार तथा तेल आपूर्ति प्रभावित न हो।

इंटरव्यू के दौरान जब फॉक्स न्यूज के एंकर ने पूछा कि क्या उन्होंने ईरान की क्षमता को कम करके आंका था, तो ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ईरान को हल्के में नहीं लिया और अमेरिका चाहे तो केवल दो दिनों के भीतर ईरान के पुलों और बिजली ढांचे को पूरी तरह निष्क्रिय कर सकता है।

ट्रंप के इन बयानों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच भी टकराव की स्थिति बनी हुई है।

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