ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 1050 इज़रायली घायल
ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद अब खुद इज़राइल को उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। ज़ायोनी घायल हो चुके हैं, जिनमें से 289 लोग केवल पिछले 24 घंटों में घायल हुए। ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि क्षेत्र में बढ़ती आक्रामक नीतियों का परिणाम अब इज़राइल के भीतर भी महसूस किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कई घायलों की हालत गंभीर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग मध्यम और हल्की चोटों से पीड़ित हैं। अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति लागू है, अतिरिक्त चिकित्सा स्टाफ तैनात किया गया है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है। रॉकेट और ड्रोन हमलों से शहरी इलाकों में भी नुकसान हुआ है, जिससे आम नागरिक प्रभावित हुए हैं।
ईरान का स्पष्ट कहना है कि उसकी कार्रवाई “जवाबी” और “रक्षात्मक” है। तेहरान का तर्क है कि जब तक अमेरिका और इज़राइल क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप और हमले जारी रखेंगे, तब तक ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए कदम उठाता रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका ने इज़राइल को खुला समर्थन न दिया होता, तो हालात इस स्तर तक न पहुंचते।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा संयम की अपील की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र में अस्थिरता की जड़ अमेरिकी-इज़राइली नीतियां हैं। अगर वाशिंगटन और तेल अवीव अपनी आक्रामक रणनीति पर पुनर्विचार नहीं करते, तो मानवीय संकट और गहराने की आशंका बनी रहेगी।
यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है, जिसमें ईरान खुद को प्रतिरोध की धुरी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

