Site icon ISCPress

‘तुम घुटने टेकने पर मजबूर हो जाओगे; पश्चिम का अहंकार धूल में मिल जाएगा: क़ालिबाफ़

‘तुम घुटने टेकने पर मजबूर हो जाओगे; पश्चिम का अहंकार धूल में मिल जाएगा: क़ालिबाफ़

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की साम्राज्यवादी बयानबाज़ी पर ऐतिहासिक पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि, प्राचीन सभ्यताओं को मिटाने की कोशिश करने वाली विदेशी ताक़तों को अंततः ऐतिहासिक अपमान और हार का सामना करना पड़ेगा।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में क़ालिबाफ़ ने रुबियो की हालिया टिप्पणियों का जवाब दिया। रुबियो ने अपने बयान में पश्चिमी वर्चस्व को गौरवशाली अतीत से जोड़ने की कोशिश की थी। इसके जवाब में क़ालिबाफ़ ने स्पष्ट किया कि ईरानी राष्ट्र ने हज़ारों वर्षों से ख़ुद को दुनिया का मालिक समझने वाली ताक़तों का सफलतापूर्वक सामना किया है।

क़ालिबाफ़ ने कहा,

पूरे इतिहास में हम ईरानियों का सामना उन लोगों से हुआ है, जिन्होंने ख़ुद को ब्रह्मांड का मालिक घोषित किया और प्राचीन सभ्यताओं को मिटाने की कोशिश की। वे आग और लपटों के साथ आए, लेकिन अंत में धूल और शर्मिंदगी के साथ लौट गए।”

उन्होंने आगे कहा,

“जो लोग सिकंदर महान की विरासत का अनुसरण करना चाहते हैं, उनका हश्र भी वैलेरियन जैसा ही होगा—तुम्हें घुटने टेकने पड़ेंगे। क़ालिबाफ़ की यह प्रतिक्रिया 8 अक्टूबर को रुबियो के दिए गए एक बयान के बाद आई। उस बयान में अमेरिकी विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन की आक्रामक विदेश नीति को प्राचीन पश्चिमी गौरव की निरंतरता के रूप में पेश करने की कोशिश की थी।

रुबियो ने कहा था, हमारा मानना है कि पश्चिम अपनी लंबी निष्क्रियता से जाग सकता है और उस आग को फिर से प्रज्वलित कर सकता है, जिसे हज़ारों साल पहले प्राचीन यूनान में पहली बार जलाया गया था। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाज़ी अमेरिकी शासक वर्ग की वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षाओं और स्वतंत्र राष्ट्रों को अपने अधीन करने की उसकी इच्छा को उजागर करती है। उनका आरोप है कि इन महत्वाकांक्षाओं को ‘सभ्यतागत पुनर्जागरण’ के नाम पर पेश किया जा रहा है।

ईरान ने अमेरिकी सैन्यवाद को सही ठहराने के लिए प्राचीन यूनान के इतिहास के रुबियो द्वारा किए गए ‘काल-विसंगतिपूर्ण’ इस्तेमाल की आलोचना की।

क़ालिबाफ़ द्वारा रोमन सम्राट वैलेरियन का उल्लेख ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। वैलेरियन को इतिहास में उस रोमन सम्राट के रूप में याद किया जाता है, जिसे युद्धबंदी बनाया गया था। 260 ईस्वी में एडेसा की लड़ाई के बाद सासानी फ़ारसी राजा शापुर प्रथम ने उसे बंदी बना लिया था।

सिकंदर महान और वैलेरियन का एक साथ उल्लेख करके ईरानी संसद के अध्यक्ष ने वॉशिंगटन को संदेश दिया कि भले ही पश्चिमी ताक़तें प्राचीन साम्राज्यों की अस्थायी विजय और विस्तार की नकल करने की कोशिश करें, लेकिन अंततः उनका हश्र भी वैलेरियन जैसा हो सकता है—यानी अपमानजनक हार और पूर्ण पराजय। यह बयानबाज़ी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इज़राइल का युद्ध जारी है।

वॉशिंगटन सैन्य हमलों, आर्थिक दबाव और कूटनीतिक अलगाव के ज़रिये तेहरान को झुकने पर मजबूर करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, ईरानी नेतृत्व लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि पश्चिमी देशों की धमकियाँ और अल्टीमेटम इतिहास में पहले भी विफल हो चुके सैन्य अभियानों की ही पुनरावृत्ति हैं।

Exit mobile version