Site icon ISCPress

हमने दुश्मन के लिए कुछ आश्चर्यजनक चीजें तैयार कर रखी हैं: ईरानी सेना

हमने दुश्मन के लिए कुछ आश्चर्यजनक चीजें तैयार कर रखी हैं: ईरानी सेना

ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफ़ज़्ल शिकारची ने शनिवार को यह चेतावनी दी है कि, इस्लामी गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी संभावित आक्रामक कार्रवाई का जवाब “नई सैन्य तकनीकों” के साथ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों ने असममित युद्ध (asymmetric warfare) की ओर रुख़ करने और देश में निर्मित रक्षा तकनीकों पर अधिक निर्भरता बढ़ाने के माध्यम से अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित किया है।

उन्होंने कहा कि, ईरान की रक्षा क्षमताओं में हुई प्रगति ने देश को पिछले दो दौर की अमेरिकी-इस्राईली “बिना उकसावे की गई आक्रामक कार्रवाइयों” की तुलना में अब अधिक मज़बूत बना दिया है—पहली कार्रवाई पिछले जून में और दूसरी इस वर्ष 28 फरवरी से 7 अप्रैल के बीच हुई थी। उन्होंने कहा, “ईरान के सशस्त्र बल बहुत अच्छी स्थिति में हैं।”

शिकारची ने कहा, “ईरान की मिसाइलें और ड्रोन अधिक उन्नत और अधिक शक्तिशाली हो गए हैं। इस बार हमने दुश्मन के लिए कुछ आश्चर्यजनक चीजें तैयार कर रखी हैं। हम दुश्मन की किसी भी संभावित आक्रामक कार्रवाई का जवाब नई सैन्य तकनीकों के साथ देंगे।”

युद्धकालीन कमी से घरेलू रक्षा आत्मनिर्भरता तक

शिकारची ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को मज़बूत करने के प्रयास 1980 के दशक में ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान शुरू हुए थे। उस समय सशस्त्र बलों ने अपनी युद्धक क्षमताओं को बेहतर बनाने और नई तकनीकों को अपनाने के प्रयास किए।

उन्होंने कहा,

“पहले थोपे गए युद्ध (ईरान-इराक़ युद्ध) के दौरान, ईरान की रक्षा करते हुए सशस्त्र बलों ने अपनी युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल करने का प्रयास किया। इसका एक स्पष्ट उदाहरण युद्ध के दौरान ईरान के मिसाइल विकास कार्यक्रम की शुरुआत थी।”

शिकारची ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान की रक्षा रणनीति में आए बदलाव को भी एक महत्वपूर्ण विकास बताया। उनके अनुसार, ईरान ने पारंपरिक युद्ध प्रणाली से हटकर असममित युद्ध की रणनीति अपनाई और उन्होंने इसे क्रांति की सफलता के बाद रक्षा सिद्धांत में हुआ “सबसे महत्वपूर्ण बदलाव” बताया।

शिकारची ने कहा, “पारंपरिक तरीके असममित युद्ध के सामने कमज़ोर पड़ जाते हैं।”

उन्होंने समझाया कि, ईरान की असममित युद्ध रणनीति का उद्देश्य महंगे और भारी हथियारों का मुक़ाबला अपेक्षाकृत कम लागत वाले, लेकिन प्रभावी और व्यावहारिक रक्षा उपकरणों से करना है। साथ ही उन्होंने कहा कि “असममित युद्ध की रणनीति आत्म-बलिदान, दृढ़ विश्वास और आध्यात्मिकता पर आधारित है।”

‘क्रांति के बाद ईरान ने अपने विरोधियों को पीछे छोड़ दिया’

शिकारची ने ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान देश को झेलनी पड़ी कमी और आज की उसकी रक्षा-औद्योगिक क्षमताओं के बीच तुलना की।

उन्होंने कहा,

“पहले थोपे गए युद्ध के दौरान तो वे हमारे घायल लड़ाकों के इलाज के लिए टांके लगाने वाला धागा (suture thread) तक ईरान को बेचने के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन क्रांति के बाद ईरान सर्जिकल धागे और कांटेदार तार (barbed wire) जैसी चीजों के आयात पर निर्भर रहने से आगे बढ़कर आज की रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने की स्थिति में पहुंच गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “क्रांति के बाद ईरान ने अपने विरोधियों के साथ प्रतिस्पर्धा की और यहां तक कि उन्हें पीछे भी छोड़ दिया।

Exit mobile version