वॉशिंगटन, तेल और डॉलर को बग़दाद पर दबाव बनाने का साधन बना रहा है: इराक़ी राजनेता
एक इराक़ी राजनेता ने बग़दाद पर अपनी नीतियां थोपने के लिए वॉशिंगटन द्वारा बढ़ते दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि, अमेरिका इस उद्देश्य के लिए तेल और डॉलर को दो दबावकारी साधनों के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए की मंगलवार की रिपोर्ट के अनुसार, अल-मालूमा के हवाले से इराक़ी राजनेता मुहम्मद धारी अल-दुलैमी ने कहा कि, डॉलर और तेल का दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल एक प्रकार की सॉफ्ट पावर है, जिसका उपयोग अमेरिकी सरकार कुछ देशों को उसकी नीतियों के सामने झुकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से करती है।
अल-दुलैमी ने कहा कि, अमेरिका अलग-अलग समय पर वित्तीय दबाव और डॉलर के माध्यम से बग़दाद पर अपनी नीतियों को स्वीकार करने के लिए दबाव डालता है।
उन्होंने इराक़ के तेल निर्यात पर ट्रंप प्रशासन के नियंत्रण और देश के संसाधनों की कथित लूट का उल्लेख करते हुए कहा कि, अमेरिकी सरकार चेतावनी और अप्रत्यक्ष धमकियों के ज़रिए बग़दाद को ऐसी स्थिति में ला रही है, जहां उसके सामने अर्थव्यवस्था को पंगु होने देने या अमेरिकी नीतियों के आगे झुकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
उन्होंने कहा कि, अमेरिका द्वारा डॉलर को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना और इसके जरिए किसी देश की अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना एक जानी-पहचानी नीति है। उनके अनुसार, अमेरिका इसी नीति का इस्तेमाल अली अल-ज़ैदी की सरकार से अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए कर रहा है।
गौरतलब है कि वॉशिंगटन ने अप्रैल में इराक़ के लिए भेजी जा रही लगभग 500 मिलियन डॉलर नकद राशि की एक खेप को रोक दिया था। साथ ही, उसने बग़दाद के साथ सुरक्षा सहयोग के कुछ हिस्सों को भी निलंबित कर दिया था।
उस समय द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इराक़ी और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बग़दाद पर दबाव बनाने के तहत इराक़ को डॉलर की खेप भेजना निलंबित कर दिया था। इसका उद्देश्य इराक़ में कुछ सशस्त्र समूहों को समाप्त करने के लिए बग़दाद पर दबाव बढ़ाना था। इसके साथ ही इराक़ी सेना के साथ कुछ सुरक्षा सहयोग कार्यक्रमों को भी रोक दिया गया था।
इन सूत्रों के अनुसार, ईरान के साथ सैन्य तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका द्वारा इस तरह की यह दूसरी डॉलर खेप रोकी गई थी। इसका उद्देश्य इराक़ पर वित्तीय और सुरक्षा संबंधी दबाव बढ़ाना था। खास तौर पर इराक़ और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद यह दबाव और बढ़ गया। समाचार सूत्रों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य इराक़ी सरकार पर कुछ सशस्त्र समूहों से हथियार वापस लेने के लिए दबाव बढ़ाना था।
इसके बाद 11 तीर (जुलाई) को न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि बग़दाद सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास के तहत नकद डॉलर की खेप रोकने के बाद अमेरिका ने इराक़ को डॉलर का हस्तांतरण फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, इराकी सुरक्षा सेवाओं के साथ सुरक्षा सहयोग और उनके वित्तपोषण पर लगी रोक उस समय भी जारी थी।

