लेबनान की शिया सर्वोच्च इस्लामी परिषद के उपाध्यक्ष की अराक़ची से मुलाकात
लेबनान की शिया सर्वोच्च इस्लामी परिषद के उपाध्यक्ष ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास आराक़ची से मुलाक़ात के दौरान, लेबनान की जनता तथा देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के समर्थन में ईरान के रुख़ की सराहना की। उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों और क़ब्ज़ाधारी इस्राईल के ख़िलाफ़ ईरान का यह रुख़ लेबनान की जनता के लिए हौसले और उम्मीद का स्रोत है।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के विदेश नीति समूह के अनुसार, लेबनान की शिया सर्वोच्च इस्लामी परिषद के उपाध्यक्ष शेख अली अल-ख़तीब, 40वें अंतरराष्ट्रीय इस्लामी एकता सम्मेलन में भाग लेने के लिए तेहरान पहुंचे हैं। उन्होंने शुक्रवार रात (28अगस्त) ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची से मुलाकात की और बातचीत की।
इस मुलाक़ात के दौरान शेख़ अली अल-ख़तीब ने लेबनान की मौजूदा स्थिति और इस देश के खिलाफ इस्राईली शासन द्वारा जारी हमलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लेबनान की दृढ़ जनता के समर्थन तथा आक्रमणकारियों और ज़ायोनी कब्ज़ेदारों के मुकाबले लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए इस्लामी गणराज्य ईरान के सिद्धांतपूर्ण रुख़ की सराहना की। उन्होंने ईरान के इन रुखों को लेबनान की प्रतिरोधी जनता के लिए हौसले और उम्मीद का कारण बताया।
वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने शेख अली अल-ख़तीब और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल की 40वें अंतरराष्ट्रीय इस्लामी एकता सम्मेलन में भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने लेबनान की प्रतिरोधी जनता तथा देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के समर्थन में इस्लामी गणराज्य ईरान की दृढ़ और निरंतर सहायता जारी रखने पर जोर दिया।
अराक़ची ने साथ ही लेबनान के ख़िलाफ़ युद्ध समाप्त करने के मुद्दे पर ईरान के विशेष ध्यान और लेबनान के कब्ज़े वाले क्षेत्रों से ज़ायोनी कब्ज़ेदारों की वापसी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अराक़ची ने इस बात पर भी जोर दिया कि ज़ायोनी शासन द्वारा किए जा रहे नरसंहार, युद्ध भड़काने और विस्तारवादी नीतियों का मुकाबला करने के लिए इस्लामी देशों के बीच एकता और एकजुटता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने क्षेत्र के देशों के खिलाफ ख़तरों और क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में विनाशकारी हस्तक्षेपों का मुक़ाबला करने के लिए इस्लामी देशों और क्षेत्रीय देशों के बीच एकजुटता को मजबूत करने को महत्वपूर्ण बताया।

