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आज दुनिया ईरान को एक शक्तिशाली और सम्मानित देश के रूप में पहचानती है: ईरानी राष्ट्रपति 

आज दुनिया ईरान को एक शक्तिशाली और सम्मानित देश के रूप में पहचानती है: ईरानी राष्ट्रपति 

ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेश्कियान ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग के बीच राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, पिछले दो वर्षों में अनेक कठिनाइयों के बावजूद आज दुनिया ईरान को एक शक्तिशाली और सम्मानित देश के रूप में पहचानती है

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि, अगर आज तक देश मज़बूती से खड़ा है, तो इसका श्रेय जनता को जाता है। यदि हम जनता के साथ रहें, तो दुनिया की कोई भी शक्ति हमें घुटनों पर नहीं ला सकती। दुश्मन लगातार दबाव डाल रहा है ताकि जनता को विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाया जा सके।

यदि हम जनता की सच्चे मन से सेवा नहीं करेंगे, तो यह ईश्वर के विरुद्ध युद्ध करने के समान होगा। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह हमारी सहायता करे ताकि हम जनता के सामने शर्मिंदा न हों।

शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई, पर्वत की तरह दृढ़ता के साथ हमारे पीछे खड़े थे

उन्होंने शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के बारे में बात करते हुए कहा: वह हमारे पीछे पर्वत की तरह दृढ़ता से खड़े थे और सरकार का पूरा समर्थन करते थे। यदि उनका सहयोग न होता, तो सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता था, लेकिन उनके समर्थन ने ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने दी।

अमेरिका और इस्राईल ने योजना बनाई थी कि, ईरान पर 48 घंटों के भीतर उसी तरह क़ब्ज़ा कर लिया जाए, जैसा सीरिया के साथ हुआ था। रमज़ान युद्ध में हमारे महान नेताओं की शहादत अत्यंत पीड़ादायक थी। तमाम कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद आज ईरान का नाम एक शक्तिशाली और सम्मानित देश के रूप में लिया जाता है।

आपसी समझौते के विषय में सुप्रीम लीडर ने विशेषज्ञों की राय को स्वीकार किया। उन्होंने कहा था कि, यदि किसी प्रस्ताव को तीन-चौथाई मत प्राप्त हो जाएँ, तो वे उसे स्वीकार करेंगे।उनसे संपर्क करना आसान नहीं है, लेकिन उनका हमारे बीच होना हमारे लिए बहुत बड़ी शक्ति है।

किस अपराध में हमारे सुप्रीम लीडर, सैन्य कमांडर और हमारे बच्चों को शहीद किया गया?

मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बारे में मेरी सारी धारणाएँ पूरी तरह बदल गई हैं। आखिर किस अपराध में हमारे नेता, हमारे सैन्य कमांडर और हमारे बच्चों को शहीद किया गया? दुश्मन को हर उस चीज़ से समस्या है जो हमारे विकास और प्रगति का कारण बनती है।

विदेशों में रहने वाले ईरानियों की वापसी के विषय में मैंने शहीद नेता से चर्चा की थी। मैंने उनसे अनुरोध किया था कि, वे निर्देश दें कि जो भी ईरानी अपने देश लौटना चाहे, उसे किसी प्रकार की परेशानी न हो। यदि किसी व्यक्ति के लिए कोई समस्या हो, तो उसे पहले ही स्पष्ट रूप से बता दिया जाए कि वह न आए। और यदि वह आ जाए, तो उसे साफ़ बता दिया जाए कि वापस लौट जाए, अन्यथा उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है।

दिनों के युद्ध के दौरान, बमबारी के बाद सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक हुई। उस समय मेरे पैर में चोट लगी हुई थी। इसके बावजूद हम शहीद सुप्रीम लीडर की सेवा में पहुँचे। उस मुलाक़ात में उन्होंने हमें आवश्यक निर्देश दिए और हमारे लिए दुआ की।

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