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ईरान के आक़क़ला पर हमले का जवाब कॉरिडोर के मुकाबले कॉरिडोर होना चाहिए 

ईरान के आक़क़ला पर हमले का जवाब कॉरिडोर के मुकाबले कॉरिडोर होना चाहिए 

अमेरिका ने चीन–तुर्कमेनिस्तान–ईरान तथा रूस–कज़ाख़स्तान–तुर्कमेनिस्तान–ईरान रेल कॉरिडोर के रणनीतिक मार्ग पर स्थित आक़-तके-ख़ान पुल को निशाना बनाकर संघर्ष को होरमुज़ जलडमरूमध्य से आगे बढ़ाते हुए कॉरिडोर संबंधी बुनियादी ढाँचे तक पहुँचा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की प्रतिक्रिया संयुक्त अरब अमीरात के जबल अली बंदरगाह और कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र में स्थित हाइफ़ा बंदरगाह पर होनी चाहिए, जिन्हें अमेरिका–इस्राईल समर्थित IMEC कॉरिडोर के प्रमुख केंद्र माना जाता है।

IMEC (भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक कॉरिडोर), जिसकी घोषणा वर्ष 2023 में की गई थी, को अब्राहम समझौते का आर्थिक परिणाम माना जाता है। इसका उद्देश्य भारत, खाड़ी के अरब देशों और इस्राईल को अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों के रूप में राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक-दूसरे से जोड़ना है।

यह कॉरिडोर यूएई के जबल अली बंदरगाह को क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र के हाइफ़ा बंदरगाह से जोड़ते हुए आगे यूरोप तक पहुँचता है। दूसरे शब्दों में, IMEC को पूर्व–पश्चिम व्यापारिक मार्गों में ईरान, रूस और चीन की धुरी को दरकिनार करने के प्रयास के रूप में देखा जाता है।

नोट: यह समाचार फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के दावे और उसमें उद्धृत विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसमें व्यक्त विश्लेषण संबंधित स्रोत का दृष्टिकोण है।

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