इमाम हुसैन के ज़ायरीन पर हुए हमले का जवाब कुवैत के अल-अदीरी सैन्य अड्डे पर हमला करके दिया गया: आईआरजीसी
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कर्बला जाने वाले ईरान – इराक़ बार्डर शिलमचेह पर हुए अमेरिकी हमले पर बयान देते हुए कहा कि, इमाम हुसैन (अ.) के ज़ायरीन के मार्ग पर हुए हमले का जवाब कुवैत के अल-अदीरी सैन्य अड्डे पर हमला करके दिया गया है।
आईआरजीसी ने कहा कि हमलावर के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और अमेरिकी सेना द्वारा आज तड़के इमाम हुसैन (अ.) के ज़ायरीन के मार्ग पर किए गए हमले के जवाब में, जिसने उसके अनुसार अमेरिका की “यज़ीदी प्रवृत्ति” को और अधिक उजागर कर दिया, आज सुबह ऑपरेशन नस्र-2 की 26वीं लहर के तहत आईआरजीसी के लड़ाकों ने संयुक्त हमले में कुवैत स्थित अल-अदीरी सैन्य अड्डे पर अमेरिका की विशेष इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई को निशाना बनाया।
बयान के अनुसार, इस कार्रवाई में उस इकाई के ठिकाने को नष्ट कर दिया गया तथा उसके सैनिकों पर भी हमला किया गया, जिसमें कई सैनिक मारे गए या घायल हुए।
आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि इस सैन्य अड्डे के हवाई यातायात नियंत्रण टॉवर (कंट्रोल टॉवर) को भी निशाना बनाया गया, जिससे उसे नुकसान पहुँचा। बयान में कहा गया कि उनकी दंडात्मक सैन्य कार्रवाई अभी जारी है।
अमेरिका को युद्धविराम का सहारा लेकर दोबारा तेल और हथियारों के भंडार फिर से भरने और उसके बाद दोबारा हमले शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी
आईआरजीसी के अनुसार, युद्ध दोबारा शुरू होने के बाद अमेरिका अपनी नौसैनिक तैनाती से हिंद महासागर में मौजूद युद्धपोतों से क्रूज़ मिसाइलें दाग रहा था। बयान में दावा किया गया कि उन जहाज़ों के मिसाइल भंडार समाप्त होने के बाद अमेरिका ने कल ब्रिटेन के फ़ेयरफ़ोर्ड वायुसेना अड्डे से उड़ान भरने वाले B-1 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया।
आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि, ईरान की भूमि पर किसी भी प्रकार के हमले के लिए जिस भी सैन्य अड्डे का उपयोग किया जाएगा, वह उसके लिए वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा।

