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राजस्थान: मृत घोषित किए गए 2 लाख मतदाता जीवित निकले, कांग्रेस ने की आलोचना

राजस्थान: मृत घोषित किए गए 2 लाख मतदाता जीवित निकले, कांग्रेस ने की आलोचना

देश में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग ने किस तरह बड़े पैमाने पर ग़लत तरीक़े से मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए और लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया, इसका एक उदाहरण राजस्थान में सामने आया है। यहां एसआईआर के दौरान मृत घोषित किए गए 8 लाख 75 हज़ार लोगों में से 1 लाख 82 हज़ार लोग जीवित पाए गए।

‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के दौरान मृत घोषित किए गए इन लोगों को जीवित पाया और उन्हें जारी पंचायत चुनावों में मतदान करने का अधिकार दिया। राजस्थान में एसआईआर के दौरान 32 लाख 31 हज़ार मतदाताओं के नाम काटे गए थे। राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया 25 अक्टूबर से 26 फरवरी तक चली।

इसी दौरान राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने भी दिसंबर 2025 से पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की घोषणा की थी। ये दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) संसद और विधानसभा चुनावों के लिए मतदाता सूचियों की निगरानी करता है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए यह ज़िम्मेदारी निभाता है।

इन दोनों संस्थाओं की ओर से तैयार की जाने वाली मतदाता सूचियां अलग-अलग होती हैं। पंचायत चुनावों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण स्वतंत्र रूप से किया गया, हालांकि यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ-साथ चली। भारत निर्वाचन आयोग की यह प्रक्रिया 21 फरवरी 2026 को पूरी हुई और इसके चार दिन बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपना काम पूरा कर लिया।

इसका अर्थ यह है कि राजस्थान के 1 लाख 82 हजार लोग पंचायत चुनावों में तो मतदान कर सकेंगे, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट डालने तथा अपने प्रतिनिधियों को चुनने के योग्य नहीं होंगे। इसका एक उदाहरण अजमेर के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 26 वर्षीय शालू डोलिया हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने उन्हें मृतकों की सूची में शामिल कर दिया था, जबकि शालू डोलिया जीवित हैं।

‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि उसने भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों के बीच अंतर की ज़मीनी स्तर पर जांच नहीं की है। वहीं, एसआईआर से जुड़े एक अधिकारी ने इस दावे का खंडन किया है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मृत घोषित किए गए लोग राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में जीवित पाए गए हैं।

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर साधा निशाना

इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने कड़ी नाराज़गी जताई है। पार्टी का कहना है कि निर्वाचन आयोग पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि राजस्थान में ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में कराए गए एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं को मृत घोषित किया गया था, उनमें से कम से कम दो लाख मतदाताओं के जीवित होने की पुष्टि खुद राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों के दौरान की है।

पवन खेड़ा ने कहा, “किसी भी सक्रिय लोकतंत्र में केवल इस एक घटना के आधार पर व्यापक जांच होनी चाहिए थी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए थी। इनमें सबसे ऊपर मुख्य निर्वाचन आयुक्त भी शामिल हैं। लेकिन यह मोदी का भारत है, जहां लोकतंत्र को उसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बंधक बना रखा है। सिद्धांत रूप से उन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिए था।”

इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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