मक्का में ईरान के ख़िलाफ़ गठबंधन नहीं बनाया: तुर्की विदेश मंत्री
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि, मिस्र भी सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का सैन्य समझौते में शामिल हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन ईरान के ख़िलाफ़ नहीं है।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने अनादोलु एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मक्का का तीन देशों वाला गठबंधन आगे बढ़कर अन्य देशों को भी शामिल कर सकता है और यह किसी भी देश, जिसमें ईरान भी शामिल है, के ख़िलाफ़ नहीं है।
ग़ाज़ा नरसंहार के दौरान यह एकजुटता कहां थी?
मक्का समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठता है कि यदि क्षेत्रीय देशों के लिए साझा सुरक्षा और सामूहिक रक्षा इतनी महत्वपूर्ण है, तो ग़ाज़ा में इस्राईल के सैन्य अभियान और व्यापक तबाही के दौरान ऐसी क्षेत्रीय एकजुटता क्यों दिखाई नहीं दी?
जब ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर जान-माल की तबाही हुई, शहरों और आवासीय इलाकों को मलबे में तब्दील किया गया और पूरी ग़ाज़ा पट्टी अभूतपूर्व मानवीय संकट से गुजरती रही, उस समय सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और क्षेत्र के अन्य देशों से इसी स्तर की सामूहिक और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही थी।
आलोचकों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय देशों के लिए सामूहिक सुरक्षा के नाम पर सैन्य समझौता किया जा सकता है, तो ग़ाज़ा में फिलिस्तीनियों की सुरक्षा और इस्राईली सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए भी ऐसी सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? उस दौर में इन देशों पर यह आरोप लगता रहा कि वे ग़ाज़ा की तबाही के सामने प्रभावी सैन्य हस्तक्षेप के बजाय मुख्यतः बयानबाजी और कूटनीतिक प्रयासों तक सीमित रहे।
विशेष रूप से यह सवाल उठता है कि जब इस्राईल ने ग़ाज़ा में लगातार हमले किए और पूरी ग़ाज़ा पट्टी को तबाही और मलबे के विशाल क्षेत्र में बदल दिया, तब इन देशों को ऐसा क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन बनाने की उतनी आवश्यकता क्यों महसूस नहीं हुई।
आलोचकों के अनुसार, उस समय मुस्लिम देशों की सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों की रक्षा और ग़ाज़ा में हिंसा रोकने के लिए किया जाना चाहिए था, न कि केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के नए सैन्य ढांचे बनाने के लिए।
इसलिए ‘मक्का समझौता ईरान के ख़िलाफ़ नहीं है’ का तुर्की का दावा अपनी जगह है, लेकिन इस समझौते की वास्तविक प्रकृति और प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब क्षेत्र पहले ही ग़ाज़ा की अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी देख चुका है और मुस्लिम देशों की सामूहिक प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
आखिरकार, क्षेत्रीय देशों के बीच रक्षा सहयोग तभी अधिक विश्वसनीय माना जाएगा, जब उसका उद्देश्य केवल सदस्य देशों की सुरक्षा तक सीमित न रहकर क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा, युद्ध रोकने और किसी भी पक्ष द्वारा किए जाने वाले हमलों के खिलाफ समान मानदंडों पर आधारित हो।

