हिज़्बुल्लाह महासचिव शेख़ नईम क़ासिम का ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा ख़ामेनेई के नाम पत्र
हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा ख़ामनेई के नाम एक बैअत-पत्र जारी कर उनके नेतृत्व के प्रति पूर्ण निष्ठा और समर्थन की घोषणा की। पत्र में उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह के कार्यकर्ता और प्रतिरोध मोर्चे के सभी सदस्य नए नेतृत्व के अधीन पहले की तरह अपने संघर्ष को जारी रखेंगे।
पत्र में उन्होंने पहले ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता की शहादत पर शोक और श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उनके जिहाद, नेतृत्व, ज्ञान और इस्लामी सेवाओं का उल्लेख किया। साथ ही ईरान, लेबनान और प्रतिरोध मोर्चे के सभी शहीदों, घायलों तथा उनके परिवारों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके लिए दुआ की।
नईम क़ासिम ने कहा कि हिज़्बुल्लाह स्वयं को ईरान और तथाकथित प्रतिरोध धुरी का अभिन्न हिस्सा मानता है तथा वह इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी), बसीज और अन्य समर्थक समूहों के साथ मिलकर अपने संघर्ष को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इमाम हुसैन (अ.स.) के आदर्शों से प्रेरित होकर अपने विरोधियों का सामना कर रहा है और इस मार्ग से पीछे नहीं हटेगा।
पत्र में उन्होंने मुज्तबा ख़ामनेई के हाथ पर बैअत करते हुए उन्हें ग़ैबत के दौर में वैध धार्मिक एवं राजनीतिक मार्गदर्शक बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में हिज़्बुल्लाह सम्मान, धैर्य और प्रतिरोध की नीति पर कायम रहेगा तथा किसी भी दबाव या आलोचना से प्रभावित नहीं होगा।
नईम क़ासिम ने कहा कि शहीदों की विरासत, घायलों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी तथा प्रतिरोध आंदोलन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाना हिज़्बुल्लाह का संकल्प है। उन्होंने भरोसा जताया कि संगठन अपने वर्तमान नेतृत्व के अधीन पहले की तरह सक्रिय रहेगा और इस्लाम, क़ुरआन तथा अहलुल बैत की शिक्षाओं के अनुरूप अपने घोषित लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करता रहेगा। पत्र का समापन इस विश्वास के साथ किया गया कि अंततः विजय अल्लाह की ओर से होगी और प्रतिरोध आंदोलन अपने उद्देश्य पर दृढ़ रहेगा।
हिज़्बुल्लाह महासचिव द्वारा लिखा गया पूरा पत्र इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जो ईमान वालों को सम्मान देता है और अत्याचारियों को अपमानित करता है। उसी ने हमारी ज़िंदगी को जिहाद और ज़ुहूर-ए-इमाम महदी (अ.स.) की तैयारी का माध्यम बनाया और हमारी मौत को अपने मार्ग में शहादत के रूप में निर्धारित किया। अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) तथा उनके पवित्र अहलुल बैत (अ.स.) पर सलाम हो, और अल्लाह उनके फ़रज (ज़ुहूर) में शीघ्रता प्रदान करे।
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“ऐ ईमान वालो! अल्लाह की आज्ञा का पालन करो, रसूल की आज्ञा का पालन करो और अपने में से अधिकार रखने वालों की आज्ञा का पालन करो।” (सूरह अन-निसा: 59)
इसके बाद…
हमारे आदरणीय नेता, वली-ए-फ़क़ीह, आयतुल्लाह सैय्यद मुजतबा ख़ामनेई साहब, अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।
हम, हिज़्बुल्लाह – इस्लामी प्रतिरोध (लेबनान) के कार्यकर्ता और आपके अनुयायी, यह पत्र आपको भेज रहे हैं। हम दुआ करते हैं कि आप पूर्ण स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ अल्लाह की हिफ़ाज़त में रहें।
सबसे पहले, हम आपके सम्मानित पिता और हमारे नेता की शहादत पर आपको मुबारकबाद पेश करते हैं। उन्होंने कई दशकों तक जिहाद, नेतृत्व, ज्ञान और सेवा का महान कार्य किया। वे एक महान फ़क़ीह, क़ुरआनी चिंतक और दूरदर्शी नेता थे और अंततः अपने महान पूर्वज इमाम अली (अ.स.) की तरह इस दौर के अत्याचारियों के हाथों शहीद हुए।
इसी प्रकार, हम प्रतिरोध मोर्चे के सभी शहीदों, घायलों और बलिदान देने वाले भाइयों, बहनों, बेटों और बेटियों, विशेष रूप से इस्लामी गणराज्य ईरान के वीरों की कुर्बानियों पर भी आपको मुबारकबाद देते हैं। हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह शहीदों पर अपनी विशेष रहमत नाज़िल करे, घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करे और उनके परिवारों को सब्र और सुकून दे।
हम बार-बार इमाम रज़ा (अ.स.) के रौज़े पर हाज़िर होकर विलायत के पवित्र स्रोत से लाभान्वित हुए हैं। हम इमाम हुसैन (अ.स.) का परचम उठाए अपने दुश्मनों से संघर्ष कर रहे हैं और इसी के साथ ईरान के अपने भाइयों—इमाम ख़ुमैनी के मार्ग पर चलने वालों, इमाम ख़ामनेई के अनुयायियों, इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी), बसीज और हर स्वतंत्र एवं सम्मानित ईरानी—के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हम उनमें इमाम हुसैन (अ.स.) का प्रेम, हज़रत अब्बास (अ.स.) का साहस और सलमान फ़ारसी की निष्ठा देखते हैं।
आज आप इस्लाम-ए-नाब मुहम्मदी का परचम उठाए हुए हैं। यही वह परचम है जिसे इमाम ख़ुमैनी के बाद आपके पूर्ववर्ती नेता ने संभाला और यही परचम इमाम हुसैन (अ.स.) ने कर्बला में बुलंद किया था, जब उन्होंने दुश्मनों की विशाल सेना के सामने डटकर कहा था:
“ख़ुदा की क़सम! मैं कभी भी अपमान स्वीकार नहीं करूँगा।”
हे हमारे नेता!
हम युद्धभूमि से, जहाँ हम अत्याचारियों के विरुद्ध अपने कर्बला जैसे संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं, पूरे विश्वास और दृढ़ता के साथ आपके हाथ पर बैअत करते हैं। हमारा विश्वास है कि यह बैअत वास्तव में इमाम महदी (अ.स.) के साथ बैअत है, क्योंकि आप ग़ैबत के दौर में उनके वैध प्रतिनिधि और हमारे मार्गदर्शक हैं।
हम आपसे वादा करते हैं कि हम सम्मान, धैर्य और इमाम महदी (अ.स.) के ज़ुहूर की तैयारी के इसी मार्ग पर चलते रहेंगे। जैसे हम अपने पूर्व नेता के साथ डटे रहे, वैसे ही आपके साथ भी पूरी निष्ठा से रहेंगे और अल्लाह के रास्ते में किसी की निंदा या दबाव से नहीं डरेंगे। शहीदों, घायलों, क़ैदियों, लापता लोगों और उनके परिवारों की अमानत हमारे कंधों पर है, और हमारे दिलों में शहीद नेता का मार्ग हमेशा जीवित रहेगा, जिसका आधार शक्ति और अल्लाह पर पूर्ण भरोसा है।
आपके नेतृत्व में, अल्लाह की इच्छा से, हम इस्लाम का परचम क़ुरआन और अहलुल बैत (अ.स.) की शिक्षाओं के अनुसार आगे बढ़ाते रहेंगे। हमारा मार्गदर्शक इमाम महदी (अ.स.) हैं और हमारे आदर्श वे शहीद हैं जिन्होंने इस राह में अपने प्राण न्योछावर किए। हम कभी स्वयं को अकेला नहीं समझेंगे, क्योंकि हमारे साथ शहीदों, घायलों, माताओं, पिताओं, पत्नियों और प्रतिरोध की पूरी उम्मत का कारवाँ है।
हम अपने महासचिव, शेख मुजाहिद नईम क़ासिम (हिफ़ज़हुल्लाह) के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे हैं और अल्लाह के उस वचन पर पूरा विश्वास रखते हैं कि अंततः धरती के वास्तविक वारिस नेक लोग होंगे और अल्लाह का दीन विजयी होगा। जब तक यह दिव्य वादा पूरा नहीं हो जाता, तब तक आप हममें केवल आज्ञाकारिता, विजय का संकल्प और शहादत का प्रेम ही पाएँगे।
“और विजय केवल अल्लाह की ओर से है, जो अत्यंत शक्तिशाली और पूर्ण बुद्धिमान है।”

