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चुनाव से पहले इस्राईल के दक्षिणपंथी ख़ैमे में दरार; बेन-गवीर ने स्मोट्रिच के साथ गठबंधन से किया इनकार

चुनाव से पहले इस्राईल के दक्षिणपंथी ख़ैमे में दरार; बेन-गवीर ने स्मोट्रिच के साथ गठबंधन से किया इनकार

इस्राईल में 2026 के चुनाव से पहले इतमार बेन-गवीर के नेतृत्व वाली पार्टी ‘ओत्ज़मा येहुदित’ (यहूदी शक्ति) और बेज़ालेल स्मोट्रिच के नेतृत्व वाली ‘धार्मिक ज़ायोनीवाद’ पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर विवाद दक्षिणपंथी खेमे की प्रमुख राजनीतिक लड़ाइयों में से एक बन गया है।

यह मतभेद केवल सीटों के बंटवारे या व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि चुनावी रणनीति का कौन-सा मॉडल बेन-ग्विर को अपने सहयोगियों—जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं—के बीच अधिक राजनीतिक प्रभाव और शक्ति दिला सकता है।

बेन-गवीर ने नेतन्याहू की दोनों पार्टियों के विलय की अपील को ख़ारिज कर दिया है। उनका दावा है कि, ऐसा गठबंधन दक्षिणपंथी ख़ैमे को मज़बूत करने के बजाय उसे कमज़ोर कर सकता है। अपनी पार्टी द्वारा कराए गए जनमत सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए उनका मानना है कि, दोनों दलों की संयुक्त सूची बनाने से 3 से 4 सीटों का नुक़सान हो सकता है, क्योंकि उनके कुछ मतदाता स्मोट्रिच के साथ गठबंधन होने की स्थिति में अपना समर्थन वापस ले सकते हैं।

बेन-गवीर ने प्रस्ताव दिया है कि स्मोट्रिच, रिज़र्व मेजर जनरल ओफिर विंटर के साथ चुनावी मैदान में उतरें, जबकि उनकी अपनी पार्टी ‘ओत्ज़मा येहुदित’ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़े।

दूसरी ओर, इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का मानना है कि दक्षिणपंथी वोटों के बिखराव से कुछ सूचियां चुनावी न्यूनतम सीमा (इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड) पार करने में विफल हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में दक्षिणपंथी ख़ैमे की अगली सरकार बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। नेतन्याहू का मानना है कि बेन-गवीर और स्मोट्रिच का गठबंधन दक्षिणपंथी खेमे में कहीं अधिक बड़ा और शक्तिशाली राजनीतिक गुट तैयार कर सकता है।

यह तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब दक्षिणपंथी राजनीति में ओफिर विंटर जैसी नई ताकतें भी चुनावी मैदान में उतर रही हैं, जिससे इस ख़ैमे के भीतर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। इसके अलावा, नेतन्याहू को कई अन्य चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन को लेकर अनिश्चितता:

नेतन्याहू के सामने यह सवाल भी है कि, आगामी चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वास्तव में उन्हें कितना समर्थन देंगे। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी ट्रंप को तटस्थ रहने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि नेतन्याहू की मौजूदा कमज़ोर चुनावी स्थिति को देखते हुए ट्रंप सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने से बच सकते हैं।

कमज़ोर गठबंधन और आंतरिक संघर्ष:

गठबंधन में कमज़ोरी और दक्षिणपंथी ख़ैमे के भीतर बढ़ते मतभेदों से नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट के लिए बहुमत खोने और अगली सरकार बनाने में असमर्थ रहने का ख़तरा बढ़ गया है।

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