Site icon ISCPress

लाल सागर के पास ईरान के अचानक हमले ने अमेरिकी ठिकानों से सुरक्षित दूरी की धारणा को तोड़ दिया 

लाल सागर के पास ईरान के अचानक हमले ने अमेरिकी ठिकानों से सुरक्षित दूरी की धारणा को तोड़ दिया 
कैंप टिटिन अक़ाबा के पास, लाल सागर के उत्तरी छोर पर स्थित है। यह क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में स्थित इलात बंदरगाह और सऊदी अरब की सीमा के अपेक्षाकृत करीब है।
अमेरिका ने कथित तौर पर फ़ारस की खाड़ी में स्थित अपने सैन्य ठिकानों की बढ़ती संवेदनशीलता के बीच अपनी सैन्य तैनाती के एक हिस्से को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से और दूर स्थानांतरित कर दिया था। लेकिन अक़ाबा की खाड़ी के तट पर स्थित कैंप टिटिन पर ईरान के मिसाइल हमले ने यह दिखा दिया कि भौगोलिक दूरी हमेशा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान की पहुंच से बाहर नहीं रख सकती।
इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फ़ोर्स ने जॉर्डन में अमेरिकी मरीन बेस के रूप में जाने जाने वाले कैंप टिटिन पर भारी बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया। यह हमला “आक्रामक को सज़ा” अभियान की दूसरी लहर के तहत किया गया।
IRGC के अनुसार, यह हमला अमेरिका की ओर से की गई “बर्बर आक्रामकता” के जवाब में किया गया, जिसमें मंगलवार रात कुह-ए-मुबारक/कूहस्तक में एक शादी पर बमबारी भी शामिल थी। IRGC ने दावा किया कि इस हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मी मारे गए तथा कई महत्वपूर्ण सुविधाएं और हमलावर हेलीकॉप्टर नष्ट हुए।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि कैंप टिटिन को निशाना बनाए जाने का व्यापक अमेरिका-इस्राईल-ईरान सैन्य टकराव में रणनीतिक महत्व हो सकता है, खासकर इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए।
कैंप टिटिन अक़ाबा के पास लाल सागर के उत्तरी छोर पर स्थित है और यह क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन के इलात बंदरगाह तथा सऊदी अरब की सीमा के अपेक्षाकृत करीब है।
यह स्थान अमेरिकी मरीन के अभ्यास, समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, उभयचर अभियानों तथा सैन्य उपकरणों और कर्मियों की तेजी से तैनाती के लिए उपयुक्त है।
अमेरिकी नौसेना के सूत्रों ने भी FASTCENT नामक त्वरित प्रतिक्रिया वाली मरीन इकाई द्वारा कैंप में अभ्यास किए जाने का दस्तावेजीकरण किया है। इससे अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के अभियानों और तेजी से सैन्य बल तैनात करने में कैंप की भूमिका स्पष्ट होती है।
फ़ारस की खाड़ी में तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुई परिस्थितियों के कारण अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक्स में आए व्यवधानों के बीच इस कैंप की कथित भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने अपनी सैन्य ताक़त के एक हिस्से को कैंप टिटिन में तैनात करने की कोशिश की थी। ऐसा प्रतीत होता है कि उसकी धारणा थी कि, या तो ईरान के पास इस तैनाती के बारे में विस्तृत खुफिया जानकारी नहीं है, या वह इस स्थान पर हमला करने में सक्षम नहीं होगा।
हालांकि, IRGC के बयान में कहा गया कि ईरान के पास अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और सैनिकों की आवाजाही के बारे में व्यापक ख़ुफ़िया क्षमताएं हैं और वह फ़ारस की खाड़ी के तत्काल आसपास के क्षेत्र से काफी दूर स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
इस बीच, रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी हमले के बाद एक मेडिवैक (चिकित्सकीय निकासी) हेलीकॉप्टर को जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर घायल सैनिकों/कर्मचारियों को लेने के लिए आते देखा गया। IRGC की यह जवाबी कार्रवाई अमेरिका द्वारा किए गए नए हमलों के बाद हुई। इन हमलों में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के चाबहार और कोनारक जिलों समेत कई अन्य इलाकों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बयान में दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई के तौर पर हवाई हमले किए। CENTCOM ने आरोप लगाया कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थी और उसने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर मिसाइलों की बौछार की थी। हालांकि, ईरानी सैन्य सूत्रों ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया।
यह ताज़ा तनाव कुछ ही दिन बाद सामने आया है, जब अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थित ईरानी द्वीप लारक पर हमले किए थे। वॉशिंगटन ने दावा किया था कि इन हमलों का उद्देश्य तेहरान को समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकना था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात अमेरिकी बलों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ईरान के सशस्त्र बलों ने दक्षिणी ईरानी प्रांतों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों की नई लहर के बाद अमेरिका पर “करारी और विनाशकारी” चोट करने का संकल्प लिया है।
Exit mobile version