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ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा ख़ामेनेई ने ‘लगातार मज़बूत होते ईरान’ का रोडमैप पेश किया

ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा ख़ामेनेई  ने ‘लगातार मज़बूत होते ईरान’ का रोडमैप पेश किया

इस्लामी क्रांति ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई  ने ‘लगातार मज़बूत होते ईरान’ के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया है। उन्होंने देश के प्रतिभाशाली और विशिष्ट लोगों से वैज्ञानिक सीमाओं को तोड़ने तथा वैश्विक ज्ञान के केंद्र को ईरान की ओर स्थानांतरित करने का आह्वान किया है।

सोमवार को हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (उन पर शांति हो) की शहादत की बरसी के अवसर पर जारी एक संदेश में सुप्रीम लीडर ने ईरान के वैज्ञानिक और खेल पदक विजेताओं को संबोधित किया।आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने खगोल विज्ञान, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानविकी सहित विभिन्न विषयों के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक ओलंपियाड में ईरानी प्रतिभागियों की हालिया सफलताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उनकी उपलब्धियों पर ईरानी जनता को बधाई दी।

मुजतबा ख़ामेनेई ने ‘नव-उपनिवेशवादी’ साज़िशों की निंदा की

मुजतबा ख़ामेनेई  ने कहा, “एक मजबूत ईरान वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति पर निर्भर करता है। यह मूलभूत स्तंभ उभरते वैश्विक समीकरणों और नई विश्व व्यवस्था में ईरान की भूमिका निर्धारित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।” उन्होंने ईरान के शत्रुओं की शत्रुता की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके अपराध इस बात का प्रमाण हैं कि ईरान की शक्ति बनाए रखने में देश के प्रतिभाशाली लोगों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा,

“वही शत्रु, जिसने दूसरे और तीसरे थोपे गए युद्धों के दौरान हमारे समाज के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रभावशाली प्रतिभाशाली लोगों की हत्या की—और निश्चित रूप से, उससे कई वर्ष पहले भी शैक्षणिक संस्थानों में तथा उनके रोजमर्रा के जीवन के दौरान ऐसी हत्याएँ कीं—वह ईरान को आगे बढ़ते और अधिक मज़बूत होते हुए बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

पश्चिम की मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक लड़ाई के बारे में चेतावनी देते हुए कहा:

“वह हमारे प्यारे ईरान की प्रतिभाओं को कमज़ोर करने के लिए अपने पास उपलब्ध हर साधन और तरीक़े का इस्तेमाल करता है। इसमें प्रतिभाशाली लोगों के बीच निराशा और हताशा फैलाना, उनके विचारों और मानसिकता पर क़ब्ज़ा करना, लोगों को नव-उपनिवेशवाद के शिकंजे में धकेलना तथा उन्हें पश्चिम की लूट और पूँजीवाद की मशीनरी के महज पुर्जों में बदल देना शामिल है।” हालाँकि, आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने ज़ोर देकर कहा कि शत्रु इस तथ्य से अनजान हैं कि:

“इस देश के शहीद प्रतिभाशाली लोगों, वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों के शरीर से बहने वाली खून की हर बूँद ने दृढ़ संकल्प और प्रगति का ऐसा तूफान पैदा किया है, जो आज भी जारी है।”

वैज्ञानिक सर्वोच्चता की रणनीति

ईरान की प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए और काजार तथा पहलवी शासनकाल के लगभग दो शताब्दियों के ठहराव से इसकी तुलना करते हुए मुजतबा ख़ामेनेई ने पिछले तीन दशकों में हुई तीव्र वैज्ञानिक प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रगति का एक बड़ा हिस्सा “हमारे महान शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के विशिष्ट क़दमों और मार्गदर्शन का परिणाम है। ईश्वर उनकी पवित्र आत्मा को पवित्रता और उच्च स्थान प्रदान करे।”

आयतुल्लाह मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि हाल में थोपे गए युद्धों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैज्ञानिक प्रगति की नई लहर अब “और अधिक गहन तथा तीव्र” होनी चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नेता ने सरकारी अधिकारियों और शैक्षणिक समुदाय के सामने एक व्यापक रणनीति प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा कि बुनियादी विज्ञान और मानविकी को आगे बढ़ाने के लिए एक गंभीर, व्यावहारिक और स्पष्ट रूप से निर्धारित योजना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे विषय किसी भी देश की वैज्ञानिक तथा तकनीकी प्रगति के प्रमुख प्रेरक हैं। इस बुनियादी विकास के साथ-साथ उन्होंने अज्ञात वास्तविकताओं की खोज करने और गणित जैसे विषयों में अनसुलझी समस्याओं का समाधान खोजने के निरंतर प्रयासों पर भी ध्यान देने का आह्वान किया। सुप्रीम लीडर ने कहा कि वास्तविक वैज्ञानिक प्रगति की आधारशिला रचनात्मकता और नवाचार में निहित है।

उन्होंने ऐसे वातावरण के निर्माण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जो सकारात्मक कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक साहस को प्रोत्साहित करे। साथ ही, उन्होंने व्यावहारिक और रचनात्मक समाधान प्रस्तुत करने वाले लोगों के लिए सार्थक प्रोत्साहन और पुरस्कार की व्यवस्था करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, वैज्ञानिक चुनौतियों और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए आत्मनिर्भरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इससे देश की आंतरिक शक्ति मजबूत होती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

‘राष्ट्रीय शक्ति का इंजन’

प्रतिभाशाली और विशिष्ट व्यक्ति की वास्तविक पहचान बताते हुए मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा:

“विशिष्ट प्रतिभा वाले लोग वे नहीं हैं, जो केवल अपनी असाधारण प्रतिभा और बुद्धिमत्ता के आधार पर स्वयं को दूसरों से अलग समझने लगते हैं और केवल अपनी क्षणिक व्यक्तिगत इच्छाओं के बारे में सोचते हैं।” उन्होंने कहा, “एक विशिष्ट व्यक्ति वह है, जो अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध हो, स्वयं को समाज का एक प्रभावी सदस्य समझे और अपनी प्रतिभा तथा क्षमता का उपयोग अपने और समाज—दोनों की उन्नति के लिए करे।”

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने वास्तविक समस्याओं के समाधान में ईरान के प्रतिभाशाली लोगों के ठोस योगदान की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “ईरान के प्रतिभाशाली लोगों ने साबित किया है कि ज्ञान और प्रतिभा को देश तथा जनता के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं के समाधान के साधनों में बदला जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “स्टेम सेल अनुसंधान, नैनो प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी से लेकर उन्नत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों तथा उद्योग, खनन, चिकित्सा, कृषि, परमाणु ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे से संबंधित तकनीकों तक, उन्होंने लगातार अपने ज्ञान, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और क्षमताओं को व्यावहारिक उपयोग में लाने का प्रयास किया है।”

उन्होंने कहा, “हम सभी अपने दैनिक जीवन में इस प्रगतिशील आंदोलन के ठोस प्रभावों और उपलब्धियों को देख रहे हैं।”

नेता ने ईरानी टर्बाइनों से उत्पन्न बिजली, स्वदेशी तकनीक पर आधारित जल-विलवणीकरण संयंत्रों, कृषि में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन, रॉयान संस्थान में विकसित उन्नत तकनीकों, रेडियोफार्मास्यूटिकल्स (रेडियोधर्मी औषधियों), रिमोट सेंसिंग उपग्रहों और रक्षा एवं सैन्य क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया।

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