ईरानी प्रतिबंधों से अच्छी तरह परिचित हैं, ट्रंप की धमकियों से ईरान पर दबाव बनाना आसान नहीं: एसोसिएटेड प्रेस
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने शुक्रवार को प्रकाशित अपनी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में ईरान के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप की नई प्रतिबंध नीति पर चर्चा की है। ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि वह ईरान के खिलाफ एक “आर्थिक डी-डे” शुरू करने और उस पर अभूतपूर्व प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, ईरान दशकों से विभिन्न प्रकार के अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करता आया है और इस वजह से वहां की अर्थव्यवस्था तथा जनता प्रतिबंधों के प्रभाव और उनसे निपटने के तरीकों से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसे में ट्रंप की नई प्रतिबंध नीति से ईरान को आसानी से झुकाने की कोशिश कितनी प्रभावी होगी, इस पर सवाल उठते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का दोबारा आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा लेना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि वह युद्ध के दौरान अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने में सफल नहीं हो सके। सैन्य दबाव से अपेक्षित परिणाम हासिल न होने के बाद अब आर्थिक दबाव को एक नए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रंप की नई नीति काफी हद तक उनके पहले कार्यकाल की “अधिकतम दबाव” नीति की पुनरावृत्ति है। उस दौरान भी अमेरिका ने ईरान पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन ईरान ने भारी दबाव के बावजूद अपनी नीतियों और स्वतंत्र रुख को बनाए रखा।
इतना ही नहीं, ट्रंप और उनके सहयोगियों को अपने पहले कार्यकाल में यह अनुभव भी हुआ कि अमेरिकी हितों को प्रभावित किए बिना द्वितीयक प्रतिबंधों को व्यापक रूप से लागू करना आसान नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर कई अन्य देशों के आर्थिक और व्यापारिक हितों पर भी पड़ता है।
इसी कारण ट्रंप के पहले प्रशासन को कई देशों के लिए प्रतिबंधों में छूट जारी करनी पड़ी थी। यह इस बात को दर्शाता है कि ईरान के ख़िलाफ़ व्यापक आर्थिक दबाव बनाना अमेरिका के लिए भी चुनौतियों से मुक्त नहीं है।
ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों का सामना करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में ट्रंप की नई प्रतिबंध नीति के बावजूद ईरान को अलग-थलग करना और उसके स्वतंत्र रुख़ को कमज़ोर करना अमेरिका के लिए आसान चुनौती नहीं होगी।

