ईरान ने दुश्मन के ख़िलाफ़ चौतरफ़ा, बहुस्तरीय और व्यापक युद्ध की तैयारी कर ली है: स्रोत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा है कि देश ने संभावित युद्ध के लिए व्यापक, बहुस्तरीय और चौतरफा तैयारी कर ली है। ईरान का कहना है कि यदि उसके ख़िलाफ़ दोबारा सैन्य आक्रामकता होती है, तो वह बिना किसी सीमा या संयम के जवाब देगा।
ईरानी सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, देश की सशस्त्र सेनाएं किसी भी संभावित हमले का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने वाले देशों और उनके क्षेत्रीय समर्थकों के उन हितों तथा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है, जो ईरान की सैन्य पहुंच में हैं। तेहरान का यह रुख दर्शाता है कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
ईरान ने अमेरिका और इस्राईल की सैन्य साझेदारी पर भी सवाल उठाए हैं। ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका और इस्राईल एक-दूसरे के सहयोग के बिना ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध नहीं छेड़ेंगे। उनके अनुसार, दोनों देशों की सैन्य रणनीतियां आपस में जुड़ी हुई हैं। ईरान का मानना है कि उसके खिलाफ दी जा रही खुली सैन्य धमकियां उसे अपनी रक्षा के लिए आवश्यक क़दम उठाने का आधार प्रदान करती हैं।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रज़ाई ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जब तक वाशिंगटन विश्वास बहाली के लिए कदम नहीं उठाता और ईरान की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। वहीं, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर क़ालिबाफ़ ने कहा कि, स्थायी युद्ध-विराम के लिए अमेरिका को तेहरान की सात शर्तें पूरी करनी होंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में हुए 14-सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन में युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे फिर से खोलने की बात कही गई है। ईरान ने मार्च में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया था।
ईरान का घोषित रुख है कि स्थायी शांति के लिए उसकी संप्रभुता, सुरक्षा और शर्तों का सम्मान आवश्यक है। हालांकि, क्षेत्र में शांति का रास्ता सैन्य टकराव बढ़ाने के बजाय कूटनीति, आपसी विश्वास और समझौतों के पालन से ही निकल सकता है।

