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होर्मुज़ अब भी ‘बंद’, अवैध रास्तों को जल्द किया जाएगा अवरुद्ध: IRGC

होर्मुज़ अब भी ‘बंद’, अवैध रास्तों को जल्द किया जाएगा अवरुद्ध: IRGC

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के एक वरिष्ठ सलाहकार ने ज़ोर देकर कहा है कि, जब तक ईरान की “वैध” मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विस्फोट करके बनाए गए कुछ “अवैध” समुद्री रास्तों को भी जल्द बंद कर दिया जाएगा।

ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रज़ा नक़दी ने बुधवार को कहा कि ईरान के सशस्त्र बलों का होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर “पूर्ण नियंत्रण” है और ईरान की मांगें पूरी होने तक स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। हालाँकि, उन्होंने बताया कि कुछ लोग छोटी नौकाओं का इस्तेमाल करके तेल की तस्करी करते हैं और उसे तेल टैंकरों तक पहुँचाते हैं।

जनरल नक़दी ने ज़ोर देकर कहा कि इन अवैध रास्तों से तस्करी किए जाने वाले तेल की मात्रा बहुत कम है। इसलिए, इसे इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारी इस समस्या से निपटेंगे।

IRGC के सलाहकार ने कहा,

“जल्द ही कुछ ऐसे सीमित समुद्री रास्तों को बंद कर दिया जाएगा, जिन्हें उल्लंघनकर्ताओं ने विस्फोट करके और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पहले से मौजूद कुछ चट्टानी मार्गों को नष्ट करके बनाया है।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब ऐसी खबरें और दावे सामने आ रहे हैं कि फ़ारस की खाड़ी से तेल का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर पर लौट रहा है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राईल द्वारा हाल ही में युद्ध शुरू किए जाने के बाद, ईरानी सशस्त्र बलों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य का परिचालन नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।

इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मच गई है। इससे पश्चिमी देशों की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और क्षेत्र में अमेरिकी सेना की सैन्य रसद व्यवस्था की कमजोरियाँ भी उजागर हुई हैं।

तेहरान ने बार-बार कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना या वहाँ सामान्य समुद्री यातायात बहाल करना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि वाशिंगटन अपनी सैन्य आक्रामक कार्रवाई बंद करे, अपनी अवैध नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और ईरान के संप्रभु अधिकारों तथा उसकी रणनीतिक सीमाओं को औपचारिक रूप से मान्यता दे।

‘ईरान हथियारों की मारक दूरी बढ़ाने के लिए तैयार’

जनरल नक़दी ने जोर देकर कहा कि ईरान के हथियारों की मारक दूरी तकनीकी सीमाओं से निर्धारित नहीं होती, बल्कि यह देश की रणनीतिक आवश्यकताओं और अधिकारियों तथा इस्लामी क्रांति के नेता द्वारा लिए गए निर्णयों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अधिक दूरी तक मार करने वाले हथियार विकसित करने की तकनीकी क्षमता है, लेकिन उनकी मारक दूरी देश की आवश्यकताओं के अनुरूप तय की जाती है।

आईआरजीसी कमांडर ने कहा,

“जब भी अधिकारी और क्रांति के नेता हमें अनुमति देंगे, हम युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुसार अपने हथियारों की मारक दूरी बढ़ा देंगे। यह रेखांकित करते हुए कि, ईरान अपने हथियारों का उत्पादन घरेलू स्तर पर करता है, जनरल नक़दी ने दोहराया कि युद्धक्षेत्र की जरूरत पड़ने पर देश अपने हथियारों की मारक दूरी और उनकी शक्ति बढ़ा सकता है।

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