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युद्ध के प्रभाव के कारण होर्मुज़ में सैन्य समाधान से पीछे हटे यूरोपीय देश: लारीजानी

युद्ध के प्रभाव के कारण होर्मुज़ में सैन्य समाधान से पीछे हटे यूरोपीय देश: लारीजानी

ईरान की सर्वोच्च नीति निर्धारण परिषद के प्रमुख शेख सादिक लारीजानी ने कहा है कि आक्रामकता के अपराध तभी रुकेंगे, जब ताक़त की भाषा में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट के सैन्य समाधान की संभावना से इनकार करने वाले यूरोपीय देशों के रुख के पीछे उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर युद्ध के पड़ने वाले प्रभाव हैं।

शेख सादिक़ लारीजानी ने ज़ोर देकर कहा कि, अमेरिका, इस्राईल और उनके यूरोपीय सहयोगी अपने अपराधों को तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक उनका सामना ताक़त से नहीं किया जाता।

लारीजानी ने रविवार को कहा कि यूरोपीय देशों का यह कहना कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य की समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है, दरअसल उनके देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर युद्ध के पड़ रहे प्रभावों का नतीजा है।

होर्मुज़ का प्रबंधन अब पहले की तरह बहाल नहीं होगा: अराक़ची

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने जोर देकर कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के रास्ते अब पहले जैसे नहीं रहेंगे और न ही इस जलडमरूमध्य का प्रबंधन पहले की तरह होगा।

अराक़ची ने आज कहा कि, पिछले युद्ध में पराजित होने वालों के पास ईरान की ताक़त और संप्रभुता का सम्मान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, ईरानी सशस्त्र बलों के निर्णायक अभियानों ने विदेशी एजेंसियों पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था की सभी गणनाओं को ध्वस्त कर दिया है।

अराक़ची ने दुश्मनों को किसी भी तरह का दुस्साहस करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि दुश्मनों में थोड़ी भी समझदारी है, तो वे दोबारा ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य युद्ध छेड़ने की कोशिश नहीं करेंगे, क्योंकि वे ऐसा दो बार करके देख चुके हैं और इसके परिणाम भी भुगत चुके हैं।

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