Site icon ISCPress

चीन ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इस्राईल की ‘खुली आक्रामकता’ की निंदा की

चीन ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इस्राईल की ‘खुली आक्रामकता’ की निंदा की

ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इस्राईल की सैन्य कार्रवाई को लेकर चीन ने कड़ा विरोध जताया है। चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने इस हमले को “खुली आक्रामकता” करार देते हुए ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके वैध अधिकारों का समर्थन किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, देशों के बीच विवादों का समाधान सैन्य ताक़त के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

ली छ्यांग ने सोमवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सरकार प्रमुखों की 25वीं बैठक के दौरान ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि 28 फरवरी 2026 को ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इस्राईल की सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में की गई, जब बातचीत जारी थी। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना की गई इस कार्रवाई का विरोध किया।

चीन ने अमेरिका के एकतरफ़ा प्रतिबंधों की भी आलोचना की और इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) को बहाल करने की आवश्यकता पर बल दिया। बीजिंग के मुताबिक, क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को सैन्य टकराव समाप्त कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ली छ्यांग ने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील की। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मध्य पूर्व में शांति, स्थिरता और साझा सुरक्षा से जुड़ी पहलों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति आरिफ़ ने चीन के समर्थन की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने SCO और BRICS जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सहयोग बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस्लामाबाद समझौते में सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से रोकने और बल प्रयोग से बचने का प्रावधान था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि इस समझौते का उल्लंघन किया गया। SCO भी ईरान पर सैन्य हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त कर चुका है। संगठन ने बल प्रयोग को अस्वीकार्य बताते हुए ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की मांग की है।

Exit mobile version