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कुवैत की जनता के नाम आईआरजीसी का महत्वपूर्ण संदेश

कुवैत की जनता के नाम आईआरजीसी का महत्वपूर्ण संदेश

अल्लाह के नाम से, जो अत्याचारियों का दमन करने वाला है।

“यदि कोई तुम पर आक्रमण करे, तो तुम भी उसी प्रकार उसका प्रतिकार करो, जैसा उसने तुम पर किया है।”

कुवैत की सम्मानित और उदार जनता!

आईआरजीसी के अनुसार, चार महीने पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई की हत्या कर दी और मीनाब के एक स्कूल में 168 बच्चों एवं विद्यार्थियों की हत्या की। बयान में दावा किया गया है कि, उसी समय से अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध युद्ध शुरू किया, जो अब तक जारी है, और इस युद्ध में होने वाले अनेक हमलों का स्रोत कुवैत की धरती पर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे रहे हैं।

आईआरजीसी का कहना है कि, बीती रात अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया। उसके अनुसार, ख़ोज़िस्तान प्रांत के हुवैज़ाह शहर में किसानों से ख़रीदे गए गेहूँ के एक गोदाम तथा इलाम प्रांत के देहलरान में स्थित एक मिनरल वाटर फैक्ट्री को भी बमबारी का निशाना बनाया गया।

बयान के अनुसार, इन हमलों के जवाब में “नस्र-2” अभियान की सातवीं लहर के तहत, “या रसूलल्लाह (स.)” के नारे के साथ आईआरजीसी की जमीनी और एयरोस्पेस सेनाओं ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के सैटेलाइट संचार केंद्र, मिसाइल एवं वायु रक्षा रडार, पैट्रियट वायु रक्षा परिसर, सैन्य रसद केंद्र (लॉजिस्टिक बेस) तथा HIMARS मिसाइल लॉन्चर प्लेटफॉर्म पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए तथा उन्हें नष्ट कर देने का दावा किया।

आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि उसका कुवैत की जनता से कोई बैर नहीं है और वह कुवैत के लोगों का सम्मान करता है। उसके अनुसार यह कार्रवाई केवल अमेरिकी सैन्य बलों के विरुद्ध की गई है। बयान में कुवैत की जनता से अपील की गई है कि वे अमेरिकी सैनिकों को अपने देश से बाहर निकालें। साथ ही दावा किया गया कि अमेरिकी सेना ने पिछले दो वर्षों में ग़ाज़ा में 70,000 फ़िलिस्तीनियों, जिनमें 20,000 बच्चे शामिल हैं, को मार डाला तथा मीनाब स्कूल की घटना को भी अंजाम दिया।

अंत में आईआरजीसी ने कुवैत की जनता से अमेरिकी संस्थानों को निशाना बनाने और इस्लामी देशों से अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया।

“यदि तुम अल्लाह के धर्म की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे कदमों को दृढ़ रखेगा।”

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