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ईरान के साथ युद्ध में यूएन द्वारा युद्ध अपराधी क़रार दिए जाने पर, अमेरिका ने मानवाधिकार परिषद से बाहर निकलने का एलान किया

ईरान के साथ युद्ध में यूएन द्वारा युद्ध अपराधी क़रार दिए जाने पर, अमेरिका ने मानवाधिकार परिषद से बाहर निकलने का एलान किया

संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-जांच मिशन द्वारा ईरान में अमेरिकी हमलों को लेकर संभावित युद्ध अपराधों के निष्कर्ष सामने रखे जाने के एक दिन बाद अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अपनी सदस्यता और भागीदारी समाप्त कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने परिषद पर “अमेरिका-विरोधी बयानबाजी” को बढ़ावा देने और कुछ देशों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।

अमेरिका के हटने का फैसला संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें नियमित सत्र के दौरान आया है, जो 7 सितंबर से जिनेवा में चल रहा है और 7 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसी दौरान ईरान पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-जांच मिशन की रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जिसमें 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान दो हमलों की जांच की गई।

संयुक्त राष्ट्र समर्थित जांचकर्ताओं ने कहा कि उनके पास यह मानने के “उचित आधार” हैं कि इन दोनों हमलों के लिए अमेरिकी सेनाएं जिम्मेदार थीं और इनमें नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को अंधाधुंध निशाना बनाया गया।

पहली घटना दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर स्थित शाजरेह तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर टॉमहॉक मिसाइल हमले की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में 160 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें लगभग 120 बच्चे थे। जांचकर्ताओं ने कहा कि स्कूल एक स्पष्ट नागरिक प्रतिष्ठान था और ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि हमले के समय उसका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्य के लिए हो रहा था। स्कूल पर बच्चों से संबंधित चित्र, स्कूल के संकेत और खेल का मैदान भी मौजूद थे। मिशन के अनुसार, अमेरिका हमला करने से पहले यह सत्यापित करने के लिए सभी संभव उपाय करने में विफल रहा कि वहां कोई सैन्य लक्ष्य मौजूद था।

दूसरी घटना फ़ार्स प्रांत के लामर्द शहर में एक खेल परिसर और आसपास के आवासीय इलाके पर हमले की थी। जांच के अनुसार, हमले में टंगस्टन के छर्रे फैलने से 22 नागरिकों की मौत हुई और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। मिशन ने इसे भी अंधाधुंध हमला बताते हुए युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा।

अमेरिकी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के इन निष्कर्षों को खारिज कर दिया और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि संबंधित तारीख को अमेरिकी सेनाओं ने लामर्द में हमला नहीं किया था।

हालांकि, हथियार विशेषज्ञों और पत्रकारों के विश्लेषण में लामर्द हमले में इस्तेमाल हथियार की विशेषताओं को PrSM मिसाइल से जोड़ा गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि हमले में PrSM का इस्तेमाल हुआ था और यह युद्ध में इस हथियार के पहली बार इस्तेमाल का परीक्षण था। विश्लेषण में हवा में विस्फोट और टंगस्टन के तेज गति वाले छर्रों के फैलाव जैसी विशेषताओं का उल्लेख किया गया।

अमेरिका पहले भी कई संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से हटने का फैसला कर चुका है और भविष्य में मानवाधिकार परिषद की सदस्यता के लिए प्रयास न करने की बात कह चुका है।

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