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अमेरिका-इस्राईल युद्ध में 370 दुश्मन विमानों को निशाना बनाया गया: ईरानी सेना

अमेरिका-इस्राईल युद्ध में 370 दुश्मन विमानों को निशाना बनाया गया: ईरानी सेना 

ईरान की सेना ने हालिया अमेरिका-इस्राईल संघर्ष के दौरान अपनी वायु रक्षा क्षमता को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरानी सेना की वायु रक्षा बल के उप-समन्वयक ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद सादिक़ियन के अनुसार, ईरान ने युद्ध के दौरान 370 से अधिक दुश्मन विमानों को निशाना बनाया और कई अमेरिकी-इस्राईली विमानों तथा ड्रोन को मार गिराया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ईरान की घरेलू स्तर पर विकसित वायु रक्षा प्रणालियों और युद्ध से मिले अनुभवों का परिणाम है।

सादिक़ियन ने बताया कि ईरान ने पहले हुए 12 दिवसीय युद्ध से महत्वपूर्ण सबक़ लिए। इस दौरान अपनी कमजोरियों और ताक़तों का आकलन करने के बाद ईरानी सशस्त्र बलों ने नई रणनीति तैयार की। उनके मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए दूसरे हमले के लिए ईरान पहले से बेहतर तरीके से तैयार था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इस्राईल को यह उम्मीद थी कि, शुरुआती हमलों में ईरान के अधिकांश वायु रक्षा रडार नष्ट हो जाएंगे, लेकिन ईरानी रक्षा नेटवर्क इसके बावजूद सक्रिय रहा।

ईरान ने विशेष रूप से अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन को निशाना बनाने का दावा किया है। सादिक़ियन के अनुसार, हालिया दिनों में फारस की खाड़ी के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 को निशाना बनाया गया। इससे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी दावा किया था कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर एक MQ-9 Reaper को मिसाइल से मार गिराया। ईरानी दावों के अनुसार, ड्रोन फारस की खाड़ी में जा गिरा।

रिपोर्ट में अमेरिकी ड्रोन बेड़े को हुए कथित नुकसान का भी उल्लेख है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने दो दर्जन से अधिक MQ-9 ड्रोन नष्ट किए हैं। यदि यह दावा सही है, तो इसकी अनुमानित आर्थिक क़ीमत क़रीब 1 अरब डॉलर हो सकती है, क्योंकि प्रत्येक MQ-9 की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर बताई गई है। अमेरिकी वायु सेना के परिचालन बेड़े में कथित कमी का भी उल्लेख किया गया है।

ईरानी अधिकारियों ने अपनी सैन्य तकनीक में सुधार का श्रेय घरेलू वैज्ञानिकों, युवाओं और रक्षा उद्योग को दिया है। ब्रिगेडियर जनरल फरज़ाद फ़रीदूनी के मुताबिक, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने पुराने और क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत व अपग्रेड, महत्वपूर्ण पुर्जों का घरेलू उत्पादन, विदेशी तकनीक की रिवर्स इंजीनियरिंग और नई रक्षा प्रणालियों के विकास में प्रगति की है।

हालांकि, फ़रीदूनी ने यह भी स्वीकार किया कि, ईरान की सभी कमियां दूर नहीं हुई हैं और देश को अपनी क्षमताओं को और मज़बूत करने की आवश्यकता है। सादिक़ियन ने कहा कि सेना, IRGC, रक्षा मंत्रालय, घरेलू उद्योगों और ज्ञान-आधारित कंपनियों के सहयोग से विदेशी उपकरणों और पुर्जों पर निर्भरता कम हुई है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि, हालिया युद्ध में ईरानी सेना और IRGC ने संयुक्त कमान के तहत काम किया, जबकि पुलिस और बसीज बलों ने भी सहयोग दिया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हमलों के बावजूद देश की सैन्य संरचना और वायु रक्षा नेटवर्क सक्रिय रहे।

कुल मिलाकर, खबर का मुख्य संदेश यह है कि ईरान अपनी स्वदेशी वायु रक्षा क्षमताओं को अमेरिका और इस्राईल के ख़िलाफ़ अपनी प्रमुख ताक़त के रूप में पेश कर रहा है, जबकि उसके अधिकारी यह भी मानते हैं कि भविष्य के संघर्षों के लिए अभी और तकनीकी तथा सैन्य सुधार आवश्यक हैं।

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