तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक हुर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक हुर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की स्थिति नहीं बनेगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने तेहरान में साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही।
बक़ाई के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राईल की सैन्य कार्रवाई के बाद हुर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया गया था। उनका कहना है कि स्ट्रेट को फिर से खोलने का फैसला अमेरिका और इजरायल की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा। उन्होंने अमेरिका से अपनी “विनाशकारी कार्रवाइयां” रोकने और आगे की बातचीत के लिए माहौल बनाने की मांग की।
ईरान ने हुर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के मुद्दे पर अमेरिका के सामने छह प्रमुख शर्तें रखी हैं।
1. धमकी बंद हो: ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी या धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल न किया जाए।
2. क्षेत्रीय हमले रोके जाएं: लेबनान, फिलिस्तीन, यमन और इराक में ईरान तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले स्थायी रूप से बंद किए जाएं।
3. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म हो: ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी हटाई जाए और अमेरिकी सैन्य बलों को वापस बुलाया जाए।
4. नुकसान की भरपाई: अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
5. प्रतिबंध हटाए जाएं: ईरान पर लगाए गए आर्थिक और अन्य प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं।
6. जब्त संपत्तियां लौटें: ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को बिना किसी शर्त के रिलीज किया जाए।
हुर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल-गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।
इसी बीच ईरान और ओमान के बीच जहाजों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर तैयार करने को लेकर बातचीत भी चल रही है। बक़ाई ने इसे दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय मामला बताया है।
ईरान के विदेश मंत्री सय्यद अब्बास अराक़्ची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है। उनके अनुसार, मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने का रास्ता तलाश रहे हैं।
अराक़्ची का कहना है कि अमेरिका को पहले समझौते के उल्लंघन रोकने होंगे और पिछले उल्लंघनों की भरपाई करनी होगी। इसके बाद ही बातचीत बहाल होने की संभावना बन सकती है।
उन्होंने कहा कि ओमान के साथ नए समुद्री रास्ते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि, अराक़्ची ने साफ किया कि ओमान के साथ किसी नए शिपिंग रूट पर सहमति बनना हुर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के बराबर नहीं होगा। हुर्मुज को खोलने का फैसला अलग-अलग शर्तों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल ईरान के रुख से साफ है कि वह हुर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका पर दबाव बनाने के एक अहम रणनीतिक साधन के तौर पर देख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस समुद्री मार्ग को लेकर होने वाली कूटनीतिक हलचल पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

