बिश्केक: ईरान के विदेश मंत्री सय्यद अब्बास अराक्ची ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों की बैठक में ईरान का प्रमुख उद्देश्य हालिया युद्ध और संघर्ष के संबंध में अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय हालात को देखते हुए शंघाई संगठन के सदस्य देशों को स्थिति की पूरी जानकारी होनी चाहिए और इसके खिलाफ सही तथा एकजुट रुख अपनाना चाहिए।
अराक्ची ने किर्गिस्तान में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में ईरान की भागीदारी के उद्देश्यों पर बात करते हुए कहा कि सबसे पहले ईरान अपने लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा। उनका यह बयान हाल के युद्ध और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इस समय पूरा क्षेत्र अस्थिर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है। ऐसे में शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के लिए जरूरी है कि वे क्षेत्र में पैदा हुई परिस्थितियों से अच्छी तरह अवगत रहें। साथ ही, उन्हें इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए सही और संयुक्त रुख अपनाना चाहिए।
ईरानी राष्ट्रपति की इस यात्रा को कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दो दिवसीय यात्रा के दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन और शंघाई प्लस बैठक में हिस्सा लेंगे और अपना संबोधन देंगे।
इसके अलावा ईरानी राष्ट्रपति सम्मेलन में शामिल होने वाले कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इनमें भारत के प्रधानमंत्री, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तथा किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपतियों के साथ होने वाली मुलाकातें शामिल हैं।
इन बैठकों में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा होने की संभावना है।
ईरान की ओर से शंघाई सहयोग संगठन के मंच का इस्तेमाल हालिया संघर्ष के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने और सदस्य देशों के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए किए जाने की उम्मीद है। अराक्ची के बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान क्षेत्रीय संकट के बीच संगठन के सदस्य देशों से साझा और स्पष्ट प्रतिक्रिया की अपेक्षा कर रहा है।

