इस्लामाबाद: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ईरान की यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिका के विशेष दूत के रूप में नहीं कर रहे थे। पाकिस्तान ने ईरान पर लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों का भी विरोध किया है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ हलकों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि सेना प्रमुख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप या अमेरिका के दूत के रूप में ईरान गए थे, लेकिन यह दावा भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा पाकिस्तान की उस लगातार जारी मध्यस्थता की भूमिका के तहत हुई, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और बातचीत का रास्ता खोलना है।
इस बीच, ईरानी वार्ता टीम के करीबी एक सूत्र ने बताया कि जनरल आसिम मुनीर की यात्रा के दौरान वे अमेरिका की ओर से कोई धमकी या इसी तरह का संदेश लेकर नहीं आए थे।
सूत्र के अनुसार, उनका उद्देश्य बातचीत के लिए माहौल तैयार करना था। उन्होंने ईरानी पक्ष की शर्तों और उसके रुख को समझने तथा उसे अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाने की कोशिश की।
सूत्र ने कहा कि जनरल मुनीर के साथ हुई बैठकों में ईरान के रुख और उसके विचारों को स्पष्ट रूप से पाकिस्तानी पक्ष के सामने रखा गया।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव के संबंध में कहा कि एकतरफा प्रतिबंधों के नकारात्मक परिणाम होते हैं और पाकिस्तान उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं मानता।
उन्होंने कहा कि “ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जारी गतिरोध का ही एक हिस्सा है। इसलिए इन मुद्दों का समाधान कूटनीति और बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।”
पाकिस्तान के इस बयान से संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत का रास्ता खोलने के लिए अपनी मध्यस्थ भूमिका जारी रखना चाहता है। साथ ही, पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं मानता।

